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September 11, 2026
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कंगना रनौत ने पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं पर साधा निशाना : कहा –” गटर जनरेशन”!

वॉयस ऑफ पानीपत ( आयुषी त्यागी )– अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाली अभिनेत्री व भाजपा सांसद कंगना रनौत एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने पश्चिमी विचारधारा से प्रभावित भारतीय महिलाओं को लेकर टिप्पणी की है । कंगना का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कंगना रनौत द्वारा किया गया पोस्ट

कंगना रनौत ने अपने अपनी पोस्ट में लिखा कि सबसे भयावह व्यवहार उन युवा हिंदू महिलाओं का है जो स्वतंत्र करियर वाली महिलाओं के जीवन की नकल करना चाहती हैं, बिना उस आज़ादी को कमाए। जो महिलाएँ वास्तव में स्वतंत्र होती हैं, वे विद्रोही फैसले लेती हैं, बेबाक राय रखती हैं, करियर में असामान्य कदम उठाती हैं, और अपने हर काम की ज़िम्मेदारी खुद लेती हैं। उन्हें ऐसा करना ही पड़ता है क्योंकि वे अपने दम पर होती हैं। वे यह सब अपने माता-पिता या परिवार की कीमत पर नहीं करतीं। तथाकथित पश्चिमी सोच वाली भारतीय महिलाओं की एक नई पीढ़ी है। मैं उन्हें “जनरेशन गटर” कहती हूँ। उनमें से कुछ के पास व्यवस्था को देने के लिए कुछ भी नहीं है। वे पढ़ाई में अच्छी नहीं हैं, लेकिन वे इतनी बदसूरत सोच और भ्रष्ट मानसिकता की हैं कि वे गृहिणी भी नहीं बन सकतीं। फिर भी वे नशा करने, शराब पीने और अनगिनत यौन संबंध बनाने की अपनी तथाकथित आज़ादी का खुलेआम दिखावा करती हैं, और बेशर्मी से अपने माता-पिता की कमाई पर जीती हैं, जबकि लगातार स्वतंत्र जीवन जीने के लिए लड़ती रहती हैं, बिना वास्तव में स्वतंत्र हुए। एक विनम्र याद दिलाना: स्वतंत्र जीवन कमाना पड़ता है। यदि आप बिना ज़िम्मेदारी लिए स्वतंत्र जीवन जीने की कोशिश करते हैं, तो आप केवल एक विकृत अस्तित्व हैं, गटर छाप।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कंगना रनौत छात्र आंदोलन को लेकर दिए गए अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में रही थीं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP द्वारा छात्रों की मांगों के समर्थन में चल रहे प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना ने आंदोलन के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी मुद्दे पर सरकार पर दबाव बनाने के लिए सड़क पर प्रदर्शन करना सही तरीका नहीं है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सार्वजनिक मुद्दों पर चर्चा और समाधान के लिए संसद सबसे उचित मंच है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भाषा और विरोध के तरीके की भी आलोचना की थी।
TEAM VOICE OF PANIPAT

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