वॉयस ऑफ पानीपत ( श्रद्धा गुप्ता ) – कैसा दौर आ गया है , पहले लोग कहते थे आपके अंत समय में तो ज़रूर खड़े होंगे और इसी उम्मीद पर लोग अपनी सारी उम्र निकाल देते थे लेकिन अब तो वो आखरी उम्मीद भी मर गई । कहते हैं अगर अंतिमक्रियाओं में अपने ना हो तो आत्मा को शांति नही मिलती सोचिए उस पिता का क्या । 3 बेटीयां होने के बाद भी अंतिमसंस्कार में एक भी नहीं , विदेश में हैं तीनों । विदेश में समय कहां होता है । सच में आज देख भी लिया सोनीपत की इस घटना से ।
हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले शिवचरण रामरत्न गुप्ता जो कि मुंबई के पूर्व बड़े कपड़े के व्यापारी थे औऱ कुछ समय से वृद्धाश्रम में रह रहे थे । पिता की तीन बेटियां थी और काम में इतनी व्यस्त की पिता के अंतिम संस्कार में भी नहीं आ सकी क्योंकि काम से छुट्टी लेना आसान नही औऱ उस नौकरी का क्या जो माता पिता ज़िंदगी भर निभाते हैं अगर उस वक्त वो व्यस्त होते तो आज तीनों बेटियाम शायद विदेश में ना होती । जब आश्रम प्रबंधन और सामाजिक संस्था द्वारा पिता के निधन की जानकारी बेटियों को दी गई तो उनका कहना था कि दूरी बहुत ज्यादा है और नौकरी से समय निकालना संभव नहीं है । पैसे भिजवाने की बात कही जिसमें से एक बेटी प्रिया ने अंतिम संस्कार के खर्च के लिए ₹ 5,100 से ₹5,500 के बीच की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर कर दी । साथ ही आश्रम के लोगों से अनुरोध किया कि अंतिम संस्कार की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग उन्हें भेज दी जाए । फिर बेटियों नें वीडीयो कॉल पर पिता को अंतिम विदाई दी । आखिर में सामाजिक संस्था और आश्रम संचालक के सहयोग से बुजुर्ग का अंतिम संस्कार कराया गया । वीडियो कॉल का माध्यम था सुविधा के लिए नाकि हम इसका एसे इस्तमाल करें । मजबूरी सुना है लेकिन किसी के पास समय ना हो वो ठीक नही । समय कभी नही होता , निकालना पड़ता है । समय निकालिए ज़रूरी है क्योंकि कल आप भी उसी स्टेज में होंगे । इसलिए अपने माता पिता के लिए हमेशा मौजूद रहें ।
TEAM VOICE OF PANIPAT

