हरियाणा सरकार की तरफ से हिसार को नई सौगात दी है। सरकार की तरफ से हिसार में नया सिविल अस्पताल बनाने की मंजूरी दी गई है। नया अस्पताल 21 एकड़ में बनाया जाएगा और इसमें आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलने वाली है। आपको बता दे कि हिसार में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ने का फायदा कई जिलों को मिलने वाला है, क्योंकि जींद, सिरसा, फतेहाबाद, भिवानी जैसे जिले के गंभीर मरीज भी हिसार में ही स्वास्थ्य सेवाएं लेते है।
ऐसे में नया अस्पताल बनाने के बाद प्रदेश के लाखों लोगों को इसका फायदा मिलने वाला है। हिसार में एयरपोर्ट रोड पर पशुधन फार्म की जमीन पर 300 बिस्तर का नया सिविल अस्पताल बनेगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने अस्पताल के लिए चिह्नित जमीन हस्तांतरण के आदेश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग को 21 एकड़ 3 कनाल और 16 मरला जमीन जनहित में फ्री ट्रांसफर की गई है। यह जमीन पहले पशुधन फार्म (पशुपालन विभाग) के अधीन थी। विभाग की वित्त आयुक्त और अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने मंजूरी दी है।
सिविल सर्जन डॉ. सपना गहलावत ने बताया कि जमीन ट्रांसफर की आपत्तियों को दूर किया है। पहले 50 बिस्तर के अर्बन हेल्थ सेंटर के लिए आजाद नगर में और अब नये सिविल अस्पताल के लिए एयरपोर्ट रोड पर जमीन मिली है। अभी 200 बिस्तर का नागरिक अस्पताल तंग पुराने भवन में चल रहा है। गुजरी महल के 300 मीटर दायरे में भवन विस्तार की अनुमति नहीं होने से सेवाएं सिमट गई हैं।
रिकॉर्ड ठीक नहीं करने से लटकती रही प्रक्रिया
एचटीएम थाना से एयरपोर्ट चौक की तरफ पशुधन फार्म की 21 एकड़ 3 कनाल 16 मरला जमीन पर एकीकृत मल्टी स्पेशलिटी सिविल अस्पताल प्रस्तावित है। अगस्त 2024 में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने घोषणा की थी। इसके बाद जमीन हस्तांतरित की प्रकिया शुरू हुई थी। रिकॉर्ड में जमीन पर वन विभाग काबिज मिला।
विभाग से एनओसी लिये बिना फाइल वित्तीय राजस्व आयुक्त को भेजी थी जिसे लौटा दिया था। महीनों के बाद पता चला कि वन विभाग से एनओसी की जरूरत नहीं। फाइल दोबारा भेजी लेकिन रिकॉर्ड में काबिज वन विभाग होने पर आपत्ति जताकर फाइल लौटा दी। करीब चार बार आपत्ति लगी थी।
रोजाना करीब 1500 ओपीडी
नागरिक अस्पताल का पहला ब्लॉक 1957 में और दूसरा ब्लॉक 1974 में बना था। वर्तमान में रोज करीब 1500 मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। अस्पताल परिसर सिरसा रोड से 7 फीट नीचे है। ऐसे में बारिश में जलभराव होता है। भू-जल स्तर बढ़ने से आज तक लिफ्ट नहीं चल सकी। बेसमेंट में स्थापित फायर स्टेशन में पानी भर जाता है।
करीब 15 साल बाद अस्पताल के सौंदर्याकरण व मरम्मत सहित अन्य कामों पर करोड़ों रुपए खर्च हो रहे हैं लेकिन नया भवन नहीं बना सकने की वजह से भीड़ नियंत्रण संभव नहीं है। सीवर लाइन वर्षों पुरानी है जिसके बंद होने से टॉयलेट पर ताला लगाना पड़ जाता है।
एमसीएच एमआरआई, कैथ लैब स्थापित नहीं
मौजूदा टीबी अस्पताल की 5 और नागरिक अस्पताल की 20 एकड़ जमीन है। नागरिक अस्पताल की आधी जमीन पर अवैध कब्जा या फिर पुरातत्व विभाग की अड्चन से खाली पड़ी है। इसलिए यहां मदर-चाइल्ड अस्पताल, कैथलैब, एमआरआई सहित अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं मुहैया नहीं हो सकीं। तंग भवन में भीड़ प्रबंधन नहीं हो पाता। यहां ईएनटी, हड्डी रोग, बाल रोग, नेत्र रोग, मेडिसीन, दंत, जनस्ल सर्जरी इत्यादि की सुविधा है, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट व न्यूरो सर्जन की सेवाएं नहीं हैं। इंटेंसिव केयर यूनिट और ट्रामा सेंटर के नाम पर तंग इमरजेंसी वार्ड है, जहां मास कैजुएल्टी में व्यवस्था गड़बड़ा जाती है।
पीडब्ल्यूडी को पत्र लिखेगा विभाग, ड्राइंग और एस्टीमेट तैयार करके मुख्यालय भेजा जाएगा
डिप्टी सिविल सर्जन कंस्ट्रक्शन विंग डॉ. सुभाष खतरेजा ने बताया कि शासन, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से नये सिविल अस्पताल के लिए पशुधन फार्म की जमीन मिली है। नया अस्पताल बनने से मैनपावर बढ़ेगी। सेवाओं का विस्तार भी संभव होगा। पीडब्ल्यूडी को ड्राइंग व एस्टीमेट तैयार करने के लिए पत्र लिखेंगे। मौजूदा अस्पताल में पुरातत्व विभाग की अड़चन से तंग भवन में सेवाएं वाएं मुहैया हैं।

