हरियाणा में किसानों के लिए एक जरूरी खबर सामने आई है। इस बार फसल गिरदावरी के लिए अंतरिक्ष तकनीक का सहारा लिया जाएगा। गिरदावरी के लिए निर्धारित 5 अगस्त से 5 सितंबर की समय- सीमा समाप्त हो चुकी है। इस दौरान पटवारियों की हड़ताल के चलते गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे नहीं हो सका। अब प्रशासन एडवांस सैटेलाइट डेटा के जरिए फसलों का आंकलन करेगा।
ऐसी होगी नई व्यवस्था
नई व्यवस्था में सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और आंकड़ों का मिलान किसानों द्वारा ‘मेरी फसल- मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर दर्ज फसल स्व-चोषणा से किया जाएगा। दोनों में अंतर मिलने पर संबंधित जमीन का मौके पर जाकर पटवारियों से प्रत्येक गांव में करीब 200 से 400 खसरा या किला नंबर का मिलान किया जाएगा।
3 चरणों में होगा डिजिटल सत्यापन
सबसे पहले सैटेलाइट इमेजरी और पोर्टल पर किसानों द्वारा दर्ज किए गए डेटा को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।
सॉफ्टवेयर दोनों डेटा स्त्रोतों को तुलना करेगा और जिन खसरा/किला नंबरों में भित्रता पाई जाएगी, उन्हें स्वचालित रूप से चिह्नित कर देगा।
पटवारी मौके पर जाकर निरीक्षण करेंगे। ऐप के माध्यम से जिओ-टैग फोटो अपलोड करनी होगी।
सैटेलाइट से फसल की गिरदावरी होगी। मिलान के दौरान फसल मिस मैच होती है तो पटवारी मौके पर वेरीफिकेशन करेंगे। इसके लिए पिछले दिनों पटवारियों ने डीएलआर के सामने स्वीकृति दी थी। मिस मैच डेटा केंद्र सरकार से जल्द आएगा। मुकेश कुमार, तहसीलदार, हिसार।
एक ही गांव में 300 से 400 खसरा/किला नंबरों का भौतिक सत्यापन करना और मौके पर जाकर ऐप से जिओ-टैग फोटो अपलोड करना मुश्किल प्रक्रिया है। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट व नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या है। डेटा अपलोड नहीं हो पाता। प्रीतम, जिला प्रधान, पटवार एसोसिएशन।

