हरियाणा में गुलाबी सुंडी का प्रकोप झेल रहे कपास उत्पादक किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। गुलाबी सुंडी से न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है बल्कि कपास की खेती से भी उनका मोहभंग होता जा रहा है। हालांकि, इस बार गुलाबी सुंडी का प्रकोप काफी कम रहा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने जुलाई, अगस्त और सितंबर में फील्ड सर्वे किया है।
नई किस्म ईजाद करने की तैयारी में HAU
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार केवल साढ़े 3% क्षेत्र में गुलाबी सुंडी का असर मिला है जबकि पिछले साल 44% क्षेत्र प्रभावित हुआ था। वहीं, हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (HAU) गुलाबी सुंडी रोधी हाइब्रिड कपास किस्म तैयार करने पर काम कर रही है। एक से दो साल में नई किस्में मिलने की उम्मीद है।
प्रदेश में साल 2019-20 में कपास का क्षेत्र 8.01 लाख हेक्टेयर था, जो 2025-26 में घटकर 2.84 लाख हेक्टेयर रह गया। यानि पिछले सात साल में करीब 65% रकबा घट गया है। कृषि विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रमोशन फॉर कॉटन कल्टीवेशन इन हरियाणा विंग का गठन किया था। इसमें प्रदेश के सबसे अधिक कपास वाले सात जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ में कपास का रकबा बढ़ाने पर फोकस किया गया है।
हरियाणा सरकार कर रही है प्रोत्साहित
प्रदेश में कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म पोषक तत्वों के इस्तेमाल पर किसानों को 2 हजार रुपये प्रति एकड़ की मदद दी जा रही है। देसी कपास लगाने पर भी किसानों को 4 हजार रुपये प्रति एकड़ आर्थिक सहायता दी जाती है। इन योजनाओं और प्रदेश सरकार के प्रयासों के बावजूद इस बार कपास का रकबा 2.84 लाख हेक्टेयर रह गया जो पिछले आठ साल में सबसे कम है।कपास में इस बार गुलाबी सुंडी का प्रकोप बेहद कम होने की रिपोर्ट मिली है। पिछले साल यह प्रकोप 44% था जबकि इस बार महज 3.5% क्षेत्र में इसका असर पाया गया।
कृषि विभाग के अधिकारी गुलाबी सुंडी पर पूरी तरह नियंत्रण के लिए काम कर रहे हैं। HAU गुलाबी सुंडी रोधी किस्म तैयार करने पर भी नई किस्म मिलने की उम्मीद है। डॉ. रामप्रताप सिहाग, अतिरिक्त निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, हरियाणा।

