वॉयस ऑफ पानीपत ( श्रद्धा गुप्ता ) – अब ई – 20 पेट्रोल पर केंद्रीय सड़क एंव राजमार्ग मंत्री नितिन गटकरी ने लिखित में ई-20 पेट्रोल से हो रहे नुकसान की बात कही है । उन्होंने कहा- BS-3 मानक वाली कुछ पुरानी गाड़ियों में ई-20 के कारण कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं । क्योंकि ये 2005 – 2006 के मॉडल हैं जो ई-20 पेट्रोल से प्रभावित हो सकते है । ये पार्ट्स नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदले जा सकते हैं । गडकरी ने कहा कि स्टडीज में ई-20 से गाड़ियों की कुल परफॉर्मेंस पर कोई बड़ा असर नहीं पाया गया है । उन्होंने यह कहा कि इन गाड़ियों के इंजन में किसी तरह का बदलाव कराने की जरूरत नहीं है । यह पहली बार है, जब गडकरी ने इस तरह की बात कही है ।
वहीं जब वाहन के टोटल लाइफ की बात हुई तो वहां नितिन गटकरी का कहना था कि वाहन का माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, रखरखाव और अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है । चलिए जानते हैं पुराने मॉडल की गाड़ीयों में 1. किस तराके से बदलाव किए जाएंगे –
ई-20 पेट्रोल यानी जिसमें पेट्रोल की मात्रा 80 % होगी और एथेनॉल की 20 % । एथेनॉल है एक तरीके का बायॉ फ्यूल है जो एग्रीकल्टरल वेस्ट से बनता है ।
2. पार्ट्स जो बदलने पड़ेंगे जैसे पाइप्स, ओ-रिंग, रबर सील, फ्यूल होज, गैस्केट, फ्यूल पंप के रबर कंपोनेंट, इंजेक्टर सील । अधिकांश रबर पार्ट फ्यूल सिस्टम में होते हैं।
3. जिन गाड़ियों के पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं जैसे यूरो-4 से नीचे के जितने भी व्हीकल्स हैं, उनमें जरूरत पड़ सकती है। संसद में पेश जवाब के मुताबिक, 1 अप्रैल 2005 से लागू बीएस-3 मानक के तहत 2016 से पहले बने दोपहिया और चारपहिया वाहन इसके दायरे में हैं।
4. एक बार पार्ट्स बदलने का खर्च होगा यह गाड़ी और मॉडल पर निर्भर है। मर्सिडीज में महंगा, तो मारुति सस्ता पड़ सकता है। दोपहिया में 500 से 1500 रुपए और फोरव्हीलर में 2 हजार से 8 हजार तक खर्च आ सकता है ।
TEAM VOICE OF PANIPAT

