हरियाणा वासियों के लिए गौरवमई खबर सामने आई है। बता दें कि हरियाणा ने रक्तदान के क्षेत्र में लगातार तीसरी साल पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि ई-रक्तकोष पोर्टल पर दर्ज सत्यापित आंकड़ों के अनुसार प्रति 10 लाख आबादी पर रक्तदान के मामले में हरियाणा सभी राज्यों में सबसे आगे है। दूसरे स्थान पर चंडीगढ़, तीसरे पर त्रिपुरा और चौथे स्थान पर उत्तर प्रदेश है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चरखी दादरी में ब्लड सेंटर को लाइसेंस मिलने के बाद अब प्रदेश के सभी 22 जिलों में कम से कम एक लाइसेंस प्राप्त सरकारी ब्लड सेंटर उपलब्ध है।
राज्य में ब्लड सेंटरों की संख्या बढ़कर 163 हो गई है। इनमें 34 सरकारी और 129 निजी सेंटर हैं। इनमें से 150 सेंटरों में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन की सुविधा उपलब्ध है। प्रदेश में स्वैच्छिक रक्तदान की दर 79% से बढ़कर अगस्त तक 92% हो गई है। यह 95% के राष्ट्रीय मानक के बेहद करीब हैं। विभाग के अनुसार, ऑनलाइन निगरानी और ब्लड सेंटरों के साथ सीधे समन्वय से स्वैच्छिक रक्तदान में सुधार हुआ है।
1 अक्टूबर को मिलेगा सम्मान
भारत सरकार की ओर से 1 अक्तूबर को नई दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस कार्यक्रम में हरियाणा को सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले 2024 और 2025 में भी हरियाणा प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल चुका है।
मरीजों को मिल रहा फायदा
आभा आधारित डोनर रजिस्ट्रेशन शुरू होने के दो महीने में 89 ब्लड सेंटर इससे जुड़ चुके हैं। वहीं, 134 सेंटर ई-रक्तकोष पर रक्त की उपलब्धता और अन्य जानकारी नियमित रूप से अपडेट कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रक्त और रक्त अवयव मुफ्त उपलब्ध कराए जाते हैं। पात्र बीपीएल और डेंगू मरीजों को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स भी मुफ्त मिलते हैं। राज्य में 1,443 थैलेसीमिया और 1,018 हीमोफीलिया मरीज पंजीकृत हैं। विभाग के अनुसार, इन मरीजों को जरूरी उपचार संबंधी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
PGI रोहतक में लगेगी खास मशीन
हरियाणा का स्वास्थ्य विभाग रक्त की सुरक्षा और जांच व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पीजीआईएमएस रोहतक के ब्लड सेंटर में आईडी नॉट मशीन लगाने की मंजूरी दी गई है। इस मशीन की मदद से रक्त में संक्रमण फैलाने वाले वायरस की अधिक प्रभावी तरीके से जांच की जा सकेगी। इससे मरीजों को और सुरक्षित रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

