August 12, 2026
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ठेले पर चाय बेचने वाला ये लड़का बना IAS, 3 बार पास की यूपीएससी परीक्षा

ठेले पर चाय बेचने वाला ये लड़का बना IAS, 3 बार पास की यूपीएससी परीक्षा

IAS Success Story : संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा भारत में सबसे प्रतिष्ठित और मुश्किल परीक्षाओं में से एक है। इस परीक्षा में सफलता हासिल करने वाले तमाम लोगों की कहानी आपने सुनी होगी, लेकिन आज हम यूपीएससी परीक्षा क्रैक करने वाले एक ऐसे आईएएस ऑफिसर की कहानी बताने वाले है, जो कभी ठेले पर चाय बेचता था। लेकिन अपनी मेहनत और लगन से उन्होनें 3 बार यूपीएससी पास किया।

कौन है IAS हिमांशु गुप्ता ?

ये कहानी आईएएस हिमांशु गुप्ता की है। हिमांशु का जन्म उत्तराखंड के उधमसिंह जिले के सितारगंज में हुआ। बाद में उनका परिवार बरेली के एक छोटे से शहर सिरौली में रहने लगा। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। माता पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे और पिता चाय का ठेला भी लगाते थे।

पिता की दुकान में चाय बेचते थे हिमांशु
हिमांशु रोजाना 70 किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल जाते थे। उनका बचपन बेहद गरीबी में गुजरा। स्कूल से लौटने के बाद वह पिता का हाथ बटाने के लिए खुद भी ठेले पर चाय बेचने जाया करते थे। कुछ समय बाद परिवार और अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए हिमांशु ने बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया।

नौकरी के साथ शुरू की UPSC की तैयारी
12 वीं पास करने के बाद हिमांशु ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में एडमिशन लिया और यहां से पढ़ाई की। इस दौरान उन्होंने नौकरी भी की। उसके बाद एक सरकारी कॉलेज में रिसर्च स्कॉलर के रूप में काम किया। तभी उन्होनें UPSC के बारें में सोचा और इसकी तैयारी शुरू कर दी। हिमांशु गुप्ता अपने पहले UPSC अटेम्पट में फेल हो गए। लेकिन उनका आईएएस अधिकारी बनने का संकल्प और मजबूत हो गया। उन्होनें फिर से इसके लिए तैयारी शुरू की और, 3 और प्रयास किए।

तीन बार पास किया UPSC
हिमांशु गुप्ता ने साल 2018 में पहली बार UPSC Exam क्लियर किया, तब उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के लिए हुआ। उन्होंने 2019 में फिर से परीक्षा दी और दूसरे प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयन हुआ। साल 2020 में अपने तीसरे प्रयास में हिमांशु गुप्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में सेलेक्ट हो गए। उन्होनें 2020 में ऑल इंडिया 139वीं रैंक के हासिल की थी। हिमांशु की सफलता की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है।

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