वॉयस ऑफ पानीपत ( मोनी कुमारी ) -सावन की कांवड़ यात्रा मे इस बार हरियाणा की हरियाणवी रागनी सिंगर काजल अपनी 90 वर्षीय सास चंद्री देवी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर हरिदूार से दिल्ली करीब 250 KM की पैदल यात्रा कर रही है। काजल ने इससे पहले भी 84 कोस की परिक्रमा भी पूरी करी थी। वहीं लोग रुककर देख रहे है और उनका होसला बढ़ रहे है। काजल चौधरी हरियाणा के पलवल जिले के होडल क्षेत्र के हताना गांव की रहने वाली थी। अभी वो दिल्ली के शाहदार में रहती है। बताया गया है कि काजल हरियाणवी गाने ,देहाती रागनी और साथ में भजनों की वजह से जानी जाती है। काजल चौधरी ने 21 जुलाई को हरिद्वार से अपनी यात्रा शुरु करी थी। काजल अपनी सास को एक कांवड़ के पलड़े मे बैठाकर दिल्ली के लिए निकल पड़ी। उनका कहना था कि मुझे 11 अगस्त तक शाहदरा पहुंचना है। काजल रोज 15 KM पैदल चलती है।

कलाकार काजल चौधरी निकली सास को लेकर यात्रा के लिए
बताया गया है कि काजल के इस यात्रा में उनका बेटा मनीष भी साथ है। और दोनों मां-बेटे बारी-बारी से कांवड़ उठाते है। और साथ ही रात को कांवड़ शिविरों में रुककर आराम करते है। बताया गया है कि ये पहली बार नही है, काजल ने पिछले साल 2025 में में भी अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिदूार से दिल्ली तक 250 KM की यात्रा की थी।
दूसरी तरफ पानीपत के जिले के नारा गांव का 35 साल का किसान सतनाम इस बार करीब 9 कविंटल् वजन की नंदी कांवड़ खीचं रहा है। वो हर दिन करीब 15 KM पैदल चलता है। सबसे खास बात ये है कि सतनाम हरिद्व्रार पैदल ही गया। पानीपत के सतनाम ने इस बार कांवड़ में 365 लीटर गंगाजल भरा था। वो एक बार में 42 केले,5 लीटर दूध और लगभग 5 किलो पपीता खाता है। उनके लिए सबसे मुशिकल काम पुलों पर चढ़ना और उतरना होता है। ये उनका पहला मौका नही है। सतनाम इससे पहले भी 6 बार नंदी कांवड़ ले चुके है। हर बार वो हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गांव जाते है।
TEAM VOICE OF PANIPAT

