NCR Vehicle Policy : एनसीआर में वाहनों को लेकर सरकार ने नियमों को कड़ा कर दिया है। ऐसे में हरियाणा के 14 जिलों के वाहन चालकों के पास बड़ा संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि अब या तो उनको नया वाहन खरीदना पड़ेगा या बिना वाहन के रहना पड़ेगा। क्योंकि दिल्ली एनसीआर में आने वाले हरियाणा के 14 जिलों में पुराने वाहनों के चलने पर पूरी तरह से रोक रहेगी, अगर किसी ने गलती से वाहन को सड़क पर निकाल दिया तो उसको पुलिस तुरंत ही जब्त कर लेगी और उनको मोटा फाइन हो सकता है।
ऐसे वाहनों को इंपाउंड किया जा सकता है या फिर वाहन मालिकों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। शुक्रवार को परिवहन आयुक्त प्रभजोत सिंह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल सभी जिलों के परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आयु सीमा पूर्ण कर चुके डीजल व पेट्रोल के वाहनों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर भिजवाएं। सर्वोच्च न्यायालय व वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग द्वारा पेट्रोल वाहनों के लिए 15 वर्ष तथा डीजल वाहनों के लिए 10 वर्ष आयु सीमा निर्धारित की गई है।
जिले में ऐसे विभिन्न श्रेणियों के 7667 वाहन चिन्हित किए गए हैं। जिला परिवहन अधिकारी वीरेंद्र सिंह कुल ने कहा कि उपरोक्त वाहन मालिकों को दी गई समय सीमा समाप्त होने पर जन सूचना के माध्यम से उन्हें सचेत किया जाता है कि वे अपने वाहन को जल्द से जल्द एनसीआर से बाहर करें या स्क्रैप करवाएं। ऐसे वाहन सड़क पर अथवा घर पर भी मिलने पर वाहन को सीधा स्क्रैप सुविधा केन्द्र भेज दिया जाएगा तथा स्क्रैप की राशि जिला खजाना कार्यालय में जमा करवा दी जाएगी।
रोहतक जिले में किस कैटेगरी में कितने वाहन
रोहतक जिले में पेट्रोल के ऐसे 1256 वाहन हैं, जो 15 साल की आयु पूरी कर चुके हैं और उसके बाद भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इसी तरह से डीजल के 6411 वाहन चिन्हित किए गए हैं। पेट्रोल के चिन्हित किए गए वाहनों में बीएस-1 के 16 वाहन, बीएस-2 के 70 वाहन, बीएस-3 के 945 वाहन तथा बीएस-4 के 225 वाहन शामिल हैं। इसी तरह डीजल के चिह्नित वाहनों में से बीएस-1 के 131 वाहन, बीएस-2 के 238 वाहन, बीएस-3 के 2247 वाहन तथा बीएस-4 के 3795 वाहन शामिल हैं।
आयु सीमा पूरी कर चुके वाहनों से ये खतरे
वायु प्रदूषणः पुराने वाहन (विशेषकर बीएस-1, बीएस-II और बीएस-III स्तर के) नए वाहनों की तुलना में बहुत अधिक मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5/पीएम 10), नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों का उत्सर्जन करते हैं।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर : इन वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
सड़क सुरक्षा जोखिमः लंबे समय तक इस्तेमाल के कारण ऐसे वाहनों के पार्ट्स (जैसे ब्रेक, सस्पेंशन और स्टीयरिंग) घिस जाते हैं, जिससे तकनीकी खराबी आने और दुर्घटनाएं होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।
कम ईंधन दक्षताः पुराने वाहनों का इंजन घिस जाने के कारण वे अधिक ईंधन की खपत करते हैं, जिससे वाहन चालक का जेब खर्च बढ़ता है और संसाधनों की बर्बादी होती है।
कानूनी कार्रवाई और भारी नुकसान्द सुप्रीम कोर्ट और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के नियमों के अनुसार एनसीआर में ऐसे वाहनों को तुरंत सीज या इंपाउंड कर स्क्रैप के लिए भेजा जा सकता है। इससे मालिक को वाहन का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हरियाणा के यह जिले आते है एनसीआर में
- फरीदाबाद
- गुरुग्राम
- नूंह (मेवात)
- रोहतक
- सोनीपत
- रेवाड़ी
- झज्जर
- पानीपत
- पलवल
- भिवानी
- चरखी दादरी
- महेंद्रगढ़
- जींद
- करनाल

