Chandigarh-Himachal Rail Corridor : चंडीगढ़ को हिमाचल से जोड़ने वाले नए रेल कॉरिडोर को लेकर बड़ा अपडेट आया है। इस रेल कॉरिडोर के माध्यम से चंडीगढ़ को हिमाचल प्रदेश के प्रमुख उद्योगिक क्षेत्र बद्दी को जोड़ा जाना है और इसके लिए 33.23 किलोमीटर लंबे ब्रॉड गेज रेल कॉरिडोर पर काम चल रहा है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट पर 47 प्रतिशत के आसपास काम हो चुका है।
हालांकि इसके काम पूरा होने की डेडलाइन दिसंबर 2026 तक रखी हुई है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी चेक में सामने आया कि प्रोजेक्ट को चालू होने में इस डेडलाइन से कहीं ज्यादा वक्त लगना तय है। ग्राउंड पर फिलहाल कई जगह पिलर तो खड़े हो चुके हैं, लेकिन उन्हें आपस में जोड़ने और पटरी बिछाने का काम बाकी है।
इसके अलावा ट्रैक इलेक्ट्रिफिकेशन का काम भी अभी शुरुआती चरण में ही है। आपको बता दे कि यह रेल कॉरिडोरवर्ष 2018 में ही अप्रूव हो गया था लेकिन इस पर काम चार साल बाद वर्ष 2022 में ही शुरू हो सका। जमीन एक्वायर करने में देरी से प्रोजेक्ट भी लेट होता गया।
चंडीगढ़ हिमाचल रेल कॉरिडोर का यहां पर अटका हुआ है काम
चंडीगढ़ हिमाचल रेल कॉरिडोर ग्राउंड रिपोर्ट देखने पर पता चला कि सुखोमाजरी पॉइंट पर सड़क के ऊपर से गुजरने वाली लाइन के लिए रेलवे ब्रिज तो बन गया है और आगे पिलर भी खड़े हैं, लेकिन पिलरों को आपस में जोड़ना और कई जगहों पर जमीन की लेवलिंग का काम अधूरा है। इसी तरह सूरजपुर पिंजौर सेक्टर-31 पॉइंट पर हाईवे के ऊपर से निकलने वाले ट्रैक के लिए पिलर तैयार हैं, लेकिन उन पर रेलवे ब्रिज बनाना बाकी है। ट्रैक के हरियाणा वाले हिस्से में मिट्टी की भराई, सब-ग्रेड तैयार करने और छोटे पुलों को कनेक्ट करने का सिविल वर्क चल रहा है।
इसलिए लेट हुआ चंडीगढ़ हिमाचल रेल कॉरिडोर
चंडीगढ़ हिमाचल रेल कॉरिडोर की मंजूरी के साथ लगातार अड़चलें आती रही है। वर्ष 2018 में प्रोजेक्ट पास होने के बावजूद जमीन अधिग्रहण की जटिल प्रक्रियाओं के कारण ग्राउंड पर काम 4 साल बाद 2022 में शुरू हो सका।33.23 किमी के कुल ट्रैक में से 12.7 किलोमीटर (लगभग 38%) हिस्सा एलिवेटेड यानी पुलों (वायडक्ट) पर है। इसे 5 अलग-अलग हिस्सों में बनाया जा रहा है। वायडक्ट का 75% काम पूरा हो चुका है, लेकिन घनी आबादी और हाईवे के ऊपर निर्माण में समय लगा।
बद्दी के उद्योग और आम लोगों को ये फायदा होगा
चंडीगढ़ हिमाचल रेल कॉरिडोर बनने के बाद फार्मा हब को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिल जाएगी। बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) बेल्ट देश में बनने वाली कुल दवाओं का 30 से 35% उत्पादन करती है और यहां 600 से अधिक एक्टिव फार्मा इकाइयां हैं। रेल लिंक से कच्चा माल लाना और तैयार दवाएं देशभर में भेजना आसान होगा। अभी पूरा ट्रांसपोर्टेशन ट्रकों पर निर्भर है।
ट्रेन चलने से दुलाई लागत और समय दोनों में भारी कमी आएगी। यह ट्रैक बद्दी को चंडीगढ़ के रास्ते ‘अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ और ‘डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ से जोड़ेगा। इससे पश्चिमी बंदरगाहों (कांडला, मुंद्रा) तक निर्यात का सामान पहुंचाना आसान हो जाएगा। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली से रोजाना बद्दी आकर नौकरी, व्यवसाय करने वाले हजार लोगों को सुरक्षित, तेज और सस्ता यातायात साधन मिलेगा।

