जींद- सोनीपत के बीच चल रही देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को यात्री नहीं मिल रहे हैं। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जींद व सोनीपत के बीच इस ट्रेन में महज 50 से 60 यात्री ही सफर करते हैं। हालांकि इससे पहले इस ट्रेन में सफर करने के लिए लोगों में काफी क्रेज रहा है, लेकिन अब यह खुमारी उतर रही है।
दरअसल सोनीपत व जींद के बीच रेल गाड़ी का परिचालन काफी पुराना है। शुरू से ही इस रूट पर यात्रियों की कमी रही है, लेकिन अब चूंकि इस रूट पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाई गई है, ऐसे में यह रूट फिर से चर्चा में है। क्योंकि 17 जुलाई को ट्रेन जींद से झंडी दिखा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रवाना की थी।
इसके बाद हाइड्रोजन ट्रेन में सफर करने के लिए लोग काफी उत्साहित थे। कुछ लोग तो दूसरे राज्यों से भी इस ट्रेन में सफर करने के लिए पहुंचे थे। अब फिर से हाइड्रोजन ट्रेन में यात्रियों का टोटा होने लगा है।
दिल्ली तक चलाने की योजना
कम यात्रियों के कारण रेलवे योजना बना रहा है कि इस ट्रेन को सोनीपत से आगे बढ़ाते हुए दिल्ली तक चलाया जाए। ऐसी संभावनाओं पर फिलहाल विचार किया जा रहा है। ऐसे में ट्रेन सोनीपत से आगे बढ़ाते हुए आजादपुर तक चलाई जा सकती है।
89 किलोमीटर का सफर
यह ट्रेन सुबह 7: 10 बजे जींद जंक्शन से चलती है और गोहाना होते हुए 89 किलोमीटर का सफर सोनीपत तक तय करती है। इसके बाद सोनीपत से वापस जींद के लिए रवाना होती है।
बेशक ट्रेन में करीब 2600 यात्रियों को बैठाने की क्षमता है, लेकिन अब इस ट्रेन में करीब 50 से 60 यात्री ही आ रहे हैं। हालांकि अभी तक ट्रेन दिन में सिर्फ एक ही चक्कर लगा रही है। यदि यात्री मिलते तो इसके दो फेर हो सकते थे।
दिल्ली से जुड़ाव
हालांकि यह ट्रेन साेनीपत के रास्ते दिल्ली से जींद का सीधा जुड़ाव करती है, लेकिन इसकी बजाय जींद से रोहतक -बहादुरगढ़ के रास्ते दिल्ली तक जाते हैं। इसका मुख्य कारण यह भी है कि जो लोग दूसरे रूट से दिल्ली जाते हैं, उनके काम धंधे और नौकरी दिल्ली के दूसरे क्षेत्र में हैं। ऐसे में हाइड्रोजन ट्रेन को ज्यादा तरजीह नहीं दी जा रही है।
फल व सब्जी मंडी से उम्मीद
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि आजादपुर में बड़ी फल व सब्जी मंडी है, ऐसे में यदि ट्रेन को आजादपुर तक चलाया जाता है तो इसमें यात्रियों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं जींद जंक्शन के एक रेलवे कर्मचारी ने कहा कि ट्रेन की टाइमिंग भी यात्रियों को प्रभावित करती है। क्योंकि यह ट्रेन करीब 9 बजे सोनीपत पहुंचती है। ऐसे में काम धंधे व नौकरीपेशा लोगों को यह समय सही नहीं जचता।
ईंधन की भी समस्या
दरअसल हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए जींद जंक्शन पर ही हाइड्रोजन प्लांट भी लगाया गया है। यहां पर पानी से हाइड्रोजन गैस बनाई जाती है। ट्रेन को एक बार रिफिल कर करीब 300 किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। जब की ट्रेन अपने तय रूट पर करीब 180 किलोमीटर तय करती है।
ऐसे में इस ट्रेन को अधिक दूरी तक चलाने के लिए फिलहाल कोई योजना नहीं है। हालांकि यदि ट्रेन दिल्ली तक जाती है तो यह दूरी करीब 130 किलोमीटर बनती है, लेकिन फिलहाल सुरक्षा कारणों को देखते हुए ट्रेन को दिल्ली तक नहीं चलाया जा रहा है।

