Haryana News: सावन की कांवड़ यात्रा के दौरान हरियाणवी रागनी गायिका काजल चौधरी अपनी अनूठी सेवा भावना के कारण चर्चा का विषय बनी हुई हैं। काजल अपनी 90 वर्षीय सास चंद्री देवी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक लगभग 250 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर रही हैं। उनकी इस पहल को देखने के लिए रास्ते में लोग रुक रहे हैं और उनका उत्साहवर्धन कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु और स्थानीय लोग काजल की अपने बुजुर्ग के प्रति समर्पित सेवा की सराहना कर रहे हैं। सोशल मीडिया और यात्रा मार्ग पर मौजूद लोग उन्हें स्नेहपूर्वक “कलयुग की श्रवण कुमार” कहकर संबोधित कर रहे हैं।
21 जुलाई को हरिद्वार से शुरू की यात्रा
मूल रूप से हरियाणा के पलवल जिले के होडल क्षेत्र के हताना गांव की रहने वाली काजल चौधरी वर्तमान में दिल्ली के शाहदरा में रहती हैं। हरियाणवी लोकगीत, देहाती रागनी और धार्मिक भजनों के क्षेत्र में उनकी अलग पहचान है।
काजल ने बताया कि उन्होंने 21 जुलाई को हरिद्वार से अपनी सास चंद्री देवी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर यात्रा शुरू की थी। उनका लक्ष्य 11 अगस्त तक शाहदरा पहुंचने का है। उन्होंने बताया कि फिलहाल वे मेरठ के मोदीपुरम तक पहुंच चुकी हैं।
प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर की पदयात्रा
काजल के अनुसार उनकी सास का वजन लगभग 50 किलोग्राम है। वह प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलती हैं। इस यात्रा में उनका बेटा मनीष चौधरी भी साथ है और दोनों बारी-बारी से कांवड़ उठाते हैं। रात के समय वे कांवड़ शिविरों में विश्राम करते हैं और अगले दिन फिर यात्रा शुरू करते हैं।
पहले भी निभा चुकी हैं सेवा का अनूठा उदाहरण
काजल चौधरी ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2025 में भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा पूरी की थी। इसके अलावा इसी वर्ष उन्होंने अपनी सास को कंधों पर बैठाकर ब्रज की 84 कोस परिक्रमा भी संपन्न कराई थी।
काजल का कहना है कि उनके लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि अपनी सास की सेवा और सम्मान का भी प्रतीक है। उनकी यह पहल श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

