हरियाणा के अनाज मंडियों में बाजरा व कपास की आवक शुरू हो गई है। जहां पर बाजरा की कीमत समर्थन मूल्य से नीचे मिल रही है, वहीं कपास के भाव में उछाल देखने को मिल रहा है। जहां पर कपास समर्थन मूल्य से ऊपर ही बिक रही है। विशेषज्ञों का कहना कि कपास में आगे के समय में तेजी आने की संभावना है। बाजरा उत्पादक किसानों को बाजरा बेचने पर 900 रुपये प्रति क्विंटल तक का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
अनाज मंडियों में अभी बाजरा की आवक न के बराबर है। मंडियों में एक से दो ढेरी बाजरा पहुंच रहा है। खुले बाजार में किसानों को बाजरा के भाव लगभग 2100 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहे हैं। जबकि इस बार बाजरा का सरकारी समर्थन मूल्य 2900 रुपये प्रति क्विंटल है। ऐसे में अगर सरकार ने जल्द बाजरा की खरीद शुरू नहीं की, तो किसानों को खुली बोली पर ही बाजरा बेचना पड़ेगा।
चिंता की बात यह है कि जब मंडियों में बाजरा की भारी आवक शुरू होगी तो खुली बोली पर बाजरा के भाव 2000 रुपये प्रति क्विंटल से भी नीचे आने की आशंका है। अगले सप्ताह से मंडियों में बाजरा की भारी आवक शुरू हो जाएगी। भिवानी जिले में इस बार लगभग 72 हजार एकड़ में बाजरा की फसल है। बाजरा कटाई का कार्य लगभग 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है। अब तेजी से किसान बाजरा निकालने का कार्य शुरू करेंगे।
लंबा रेशा वाली कपास का समर्थन मूल्य 8110 रुपये प्रति क्विंटल
इस बार कपास समर्थन मूल्य से ऊपर बिक रही है। इस बार कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य 7710 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। वहीं लंबे रेशा की कपास का समर्थन मूल्य 8110 रुपये प्रति क्विंटल है। मंडियों में किसानों को खुली बोली पर कपास के दाम समर्थन मूल्य से 400 से 600 रुपये ज्यादा मिल रहे हैं।
भिवानी अनाज मंडी में शुक्रवार को कपास की खुली बोली में दाम 8500 से 8700 रुपये प्रति क्विंटल तक बन रहे हैं। मंडी में हर रोज लगभग 5 हजार क्विंटल कपास पहुंच रही है। खास बात यह है कि इस बार कपास की गुणवत्ता पिछले साल से कई गुना बेहतर है। पिछले साल अत्यधिक बारिश के कारण कपास की फसल काली पड़ गई थी।
इसके कारण खुली बोली में किसानों को पांच से छह हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर कपास बेचनी पड़ी थी। इस बार बारिश कम हुई है। गुणवत्ता में कमी नहीं आई है। इस बार जिले में कपास बिजाई का क्षेत्र पहले से काफी कम रहा है। कम पैदावार के चलते मंडियों में कपास के भाव समर्थन मूल्य से भी अधिक बने हुए हैं। पिछले साल लगभग एक लाख 13 हजार एकड़ में कपास की फसल थी। इस बार केवल 60 हजार एकड़ भूमि में कपास है।
बाजरे की सरकारी खरीद की मांग
अनाज मंडियों में बाजरा की आवक शुरू हो चुकी है, लेकिन सरकार ने अब तक खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं की है। इससे किसान, आढ़ती और एजेंसियां असमंजस में हैं। खुली बोली में बाजरा 2100 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि सरकारी समर्थन मूल्य 2,900 रुपये है। खरीद न होने से किसानों को 900 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है। कामरेड ओमप्रकाश ने जल्द सरकारी खरीद शुरू करने की मांग की है।
बाजरे का आवक शुरू
भिवानी के हैफेड मैनेजर रामनारायण ने बताया कि अभी अनाज मंडियों में बाजरा की आवक शुरू नहीं हुई है। एक से दो ढेरी ही पहुंच रही हैं। बाजरा की खरीद के संबंध में विभाग को अभी कोई पत्र नहीं मिला है।

