हरियाणा के युवाओं का सेना में जाने का जज्बा देश के लिए प्रेरणादायक है। हरियाणवी युवाओं को कोई भी बड़ा झटका सेना से दूर नहीं कर सकता है। ऐसे ही एक कहानी है रेवाड़ी जिले के गांव भोड़ाकलां के बलिदानी ऋषिपाल सिंह चौहान के परिवार की है।
बलिदानी ऋषिपाल सिंह चौहान की शौर्य गाथा अब उनका बेटा ऋषभ आगे बढ़ाएगा। कठोर सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ऋषभ भारतीय सेना में शामिल हो गए हैं। उनकी पहली तैनाती कश्मीर में हुई है। गौरव की बात यह है कि उन्हें उसी 15 कुमाऊं रेजीमेंट में सेवा का अवसर मिला है, जिसमें उनके पिता तैनात थे।
ऋषिपाल सिंह चौहान ने 19 नवंबर 2016 को असम में हुए उग्रवादी हमले के दौरान अदम्य साहस का परिचय देते हुए मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। पति की शहादत के बाद वीरांगना लक्ष्मी देवी ने संकल्प लिया था कि वह अपने बेटे को भी देश सेवा के लिए सेना में भेजेंगी। वर्षों बाद उनका यह संकल्प पूरा हुआ है।
ऋषभ के सेना में शामिल होने से परिवार के साथ पूरे गांव में गर्व और खुशी का माहौल है। उनके ताऊ प्रेमपाल सिंह ने कहा कि ऋषभ ने अपने पिता की वीरता और देशसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया है। सरपंच मनवीर चौहान, पूर्व सरपंच यज्ञविंद्र गोगली, भोड़ाकलां बावानी के अध्यक्ष राजेश चौहान और भाजपा नेता महेश सैनी ने भी ऋषभ को शुभकामनाएं दीं।
ग्रामीणों ने कहा कि पिता के बलिदान के बाद उसी रेजीमेंट में बेटे का शामिल होना परिवार के लिए गौरव का विषय है। ऋषभ के सेना में जाने से युवाओं को भी देशसेवा के लिए प्रेरणा मिलेगी। परिवार को उम्मीद है कि वह अपने पिता की तरह कर्तव्य और राष्ट्रसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।

