SUCCESS STORY : राजस्थान बेटी मेविश टाक ने अपनी मेहनत और लगन से आईपीएस बन कर न सिर्फ इतिहास रच दिया है। इसके साथ ही उन्होंने ऐसे लोगों के मुंह भी बंद कर दिए, जो बेटियों को पढ़ाने पर उनके पिता को ताने मारते थे। क्योंकि लोग कहते थे कि बेटियों को पढ़ा कर कौनसा कलक्टर-एसपी बना दोगे।

ऐसे ताने सहने वाले पिता की बेटी बेटी मेविश टाक आज उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में पहली महिला एएसपी के तौर पर सेवारत हैं। क्योंकि सोनभद्र में इससे पहले पुरुष ही इस पद पर रहे हैं। अपनी नई पोस्टिंग के साथ ही मेविश टाक ने दो इतिहास रच दिए हैं।
मुंबई में हुई पढ़ाई
हालांकि मेविश टाक की पढ़ाई मुंबई में हुई है, लेकिन वे मूल रूप से राजस्थान के पाली की रहने वाली हैं। मेविश टाक के पिता अब्दुल करीम टाक बॉम्बे हाईकोर्ट में बतौर अनुवादक कार्यरत हैं।

एक टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में मेविस ने बताया कि वे तीन बहनें हैं। राजस्थान में रिश्तेदार बेटियों को पढ़ाने पर उनके पिता को ताने मारते थे। लोगों ने कहा कि बेटियों को इतना पढ़ा रहे हो कौनसा कलक्टर-एसपी बना दोगे।
दो बार मिली असफलता, नहीं मानी हार
मेविश टाक के अनुसार यूपीएससी में सफलता इतनी भी आसान नहीं थी। पहले 2 प्रयासों में उनको असफलता मिली। इसके बावजूद प्रयास जारी रखा और तीसरे प्रयास में उनको 386वीं रैंक मिली।

इससे उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा याी आईपीएस के रूप में हुआ। लगातार मिली असफलताओं से निराश होने की बजाय उन्होंने कमजोरियों को पहचान कर इनमें सुधार किया और सफलता मिली।
जन्मदिन के पर ही मिला एएसपी का तोहफा

पिछले दिनों 24 सितंबर को ही मेविश टाक ने अपना जन्मदिन मनाया है। उनका जन्म मेविश टाक का जन्म 24 सितंबर 1996 को हुआ है। इसी दिन यानी 24 सितंबर को 2026 को उनको सोनभद्र जिले की एएसपी के रूप में तैनाती मिली। इससे पहले मेविश टाक बांदा जिले में सीओ के पद पर तैनात रही हैं। यहां वे क्षेत्राधिकारी नगर, साइबर और क्राइम जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र देख रही थी।

