वॉयस ऑफ पानीपत (श्रद्धा गुप्ता ) – देवशयनी एकादशी का महत्तव और कथा दोनो ही आपके लिए जानना बेहद लाभदायक हो सकता है । इस महीने में किया गया पूजा पाठ , नाम जप , व्रत का लाभ बहुत है । आषाढ़ शुक्ल पक्ष को आने वाली एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं जो इस बार 24 जुलाई सुबह 9:12 से 25 जुलाई सुबह 11:34 तक रहेगी । जिसके व्रत का पारण 25 जुलाई को होगा । एकादशी के बाद से ही चतुर्मास की शुरूवात हो जाती है , जहां मान्यता है कि भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और 4 महीने के लिए भगवान शिव पर संसार का कार्यभार आ जाता है । इसी कारण से कोई भी मांगलिक कार्य इन 4 महीनों में नही होता क्योंकि माना जाता है कि भगवान विष्णु की उपस्थिती नही होती औऱ उनके बिना शुभ कार्य करना उचित नही इस लिए इस समय में विवाह , मुंडन जैसे कार्य नही होते ।
अब जानते हैं भगवान विष्णु के योगनिद्रा के पीछे की कथा , ये कथा है भगवान के वामन अवतार की जो राजा वलि से जुड़ी है । जब भगवान ने वामन इवतार में राजा बलि से 3 पग भूमि मांगी तो पहले पग में पृथ्वी , आकाश और सारी दिशाएं नाम ली वहीं दुसरे पग में सारा स्वर्ग औऱ तीसरे में राजा बलि नें अपना सिर आगे कर दिया इसी से प्रसन्न हो कर भगवान ने राजा बलि को पाताल लोक का अधिपति बना दिया । वही राजा ने भगवान से उनके साथ रूकने की बात की और इसी कारण भक्त की इच्छा पुरी करने के लिए भगवान 4 महीनों के लिए पाताल लोक में निवास करते हैं , जिसे चतुर्मास भी कहा जाता है और इसकी शुरूवात एकादशी से होती है , जिस वक्त सावन भी शुरू होता है ।
TEAM VOICE OF PANIPAT

