देश के अलग- अलग राज्यों में लंपी वायरस के बढ़ते प्रकोप ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित और कई राज्यों में इस वायरल का संक्रमण काफी ज्यादा है।
‘लम्पी स्किन डिजीज’ मुख्य रूप से गायों और भैंसों में फैलने वाला एक संक्रामक वायरल रोग है, जो ‘कैप्रिपोक्स’ नाम के वायरस से होता है। ये वायरस मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे खून चूसने वाले कीटों के जरिए एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है।
हरियाणा में भी इसके कई मामले सामने आए है। जिसके बाद पशुपालन विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। साथ ही पशुपालको को इस वायरस के लक्षणों और इससे पशुओं के बचाव की जानकारी भी दी गई है।
क्या है वायरस के लक्षण ?
पशु चिकित्सकों के अनुसार इस वायरस के कारण पशुओं के गर्दन, पीठ, थन और पैरों पर 2 से 5 सेमी व्यास की गोल और कठोर गांठें निकल आती हैं और पशुओं को 104°F से 106°F तक तेज बुखार रहता है। साथ ही आंखों और नाक से पानी या गाढ़ा स्राव बहने लगता है और पशु चारा खाना कम या फिर बंद कर देता है।
ऐसे करें बचाव
अगर पशुओं में ये लक्षण दिखें तो तुरंत पशुपालक पशु को स्वस्थ पशुओं के बाड़े से अलग करें।
घाव होने पर उन्हें लाल दवा (पोटैशियम परमैंगनेट) के पानी से धोएं और नीम का तेल या एंटीसेप्टिक मलहम लगाएं।
पशु चिकित्सक की सलाह पर ही बुखार और दर्द निवारक दवाएं दें।
पशुओं लम्पी की रोकथाम वाली वैक्सीन लगवाएं।
मच्छर, मक्खी और किलनी को रोकने के लिए पशुशाला में नीम के पानी या सुरक्षित कीटनाशक का छिड़काव करें। साथ ही बाड़े की नियमित सफाई करें ।

