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September 30, 2026
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हरियाणा में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम में क्रांति, बिचौलिये हटे और तहसीलों के चक्कर खत्म

हरियाणा में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम में क्रांति

Haryana Property Registration : हरियाणा का बड़ा प्रशासनिक सुधार होने से प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम में क्रांति आई है। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम के लिए 140 दस्तावेजों के टेम्पलेट तैयार किया है। इस प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम के बाद जहां लोगों के तहसील के चक्कर काटना कम हो गया है, पेपरलेस रजिस्ट्रेशन होने से हरियाणा सरकार के राजस्व में भी रिकार्ड वृद्धि हुई है।

अब तक 65 लाख से ज्यादा डिजिटल पंजीकरण पूरे हो चुके है और सरकार का स्टांप शुल्क राजस्व में 10% तक बढ़ोतरी हुई है। हरियाणा ने अपनी प्रक्रियाओं को डिजिटाइज़ करके लगभग 140 प्रकार के दस्तावेजों के लिए मानक टेम्पलेट्स लागू करके और बिचौलियों को हटाकर संपत्ति पंजीकरण शुरू किया है। हरियाणा के वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस व्यापाक बदलाव के बाद स्टांप शुल्क राजस्व में प्रति वर्ष लगभग नौ से दस प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।

डॉ. मिश्रा ने बुध्वार को चंडीगढ़ में ‘हरियाणा के स्वयं के कर राजस्व को सुदृढ़ बनाना और विकसित हरियाणा@2047 के लिए कर संरचना में सुधार और विश्लेषणात्मक कर प्रशासन’ विषय पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि इस नए सिस्टम के माध्यम से पहले तहसीलों के चक्कर काटकर परेशान रहने वाले लोगों को बड़ी राहत दी है।

पहले संपत्ति रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए स्टाम्प विक्रेताओं, विलेख लेखकों, वकीलों और अन्य बिचौलियों के पास जाना पड़ता था, लेकिन अब हरियाणा सरकार ने इस प्रक्रिया को इतना सरल कर दिया अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री करवाना आसान हो गया।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन सिस्टम को डिजिटल हस्ताक्षर, सुरक्षित प्रमाणीकरण और आधार-लिंक्ड प्रक्रियाओं को भी सिस्टम में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा, “आप चाहें तो इनमें से किसी भी मध्यस्थ को दरकिनार कर सकते हैं।” अब नागरिक केवल अपनी जानकारी दर्ज करते हैं और राजस्व अधिकारियों द्वारा समीक्षा के लिए जमा करते हैं, जिन्हें दस्तावेजों की जांच करके निर्धारित समय सीमा के भीतर वापस करना होता है।

अब तक 65 लाख से अधिक पंजीकरण पूरे हो चुके हैं। नए सुरक्षा उपायों से यह सुनिश्चित होता है कि फाइलें बार-बार सुधार के लिए वापस नहीं भेजी जाएंगी, क्योंकि अधिकारियों को एक दस्तावेज को दो बार से अधिक वापस भेजने की अनुमति नहीं है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि हमें छूट, प्रोत्साहन और रियायतों के पूरे कारोबार की जांच करनी होगी, बिना किसी पुराने पूर्वाग्रह के। उन्होंने कहा, “हमें यह देखना होगा कि वास्तव में क्या काम करता है और क्या काम नहीं करता है।”

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