Haryana Employee Transfer Policy : हरियाणा के शिक्षक, रोडवेज कर्मचारी सहित अन्य विभागों के कर्मचारी नई ट्रांसफर्म पॉलिसी के माध्यम से ट्रांसफर एक्सप्रेस चलने का लंबे समय से इंतजार कर रहे है, लेकिन सरकार की नई पॉलिसी नियमों में उलझने के कारण आगे नहीं बढ़ रही है।
बार-बार पॉलिसी में बदलाव किया जा रहा है, लेकिन फिर से कर्मचारियों का विवाद खड़ा हो जाता है। हालांकि हरियाणा सरकार की तबादला नीति में सेवा, वरिष्ठता और विभागीय जरूरत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है, लेकिन नए नियमों में उम्र और पदोन्नति का हिसाब वर्षों के अनुभव पर भारी पड़ता दिख रहा है।
शिक्षा विभाग में उम्र के अंक आधे होने से कम उम्र में नियुक्त शिक्षक अपने से करीब 10 साल बड़े उन शिक्षकों से मेरिट में आगे निकल सकते हैं, जिनकी नियुक्ति बाद में हुई। पदोन्नति पाने वाले शिक्षकों की पिछली सेवा को अनुभव में नहीं जोड़ने से लंबे सेवाकाल का लाभ भी सीमित हो जाता है। दूसरी ओर जेबीटी शिक्षक करीब एक दशक से नियमित तबादले की प्रतीक्षा में हैं। रोडवेज में भी पदोन्नति के बाद तबादले के नियमों में समान स्थिति नहीं दिख रही। ऐसे में सवाल केवल तबादले का नहीं, बल्कि नीति में सेवा अवधि, अनुभव और जरूरत को दिए जा रहे महत्व का है।
जेबीटी के लिए वर्षों से बंद है नियमित रास्ता
हरियाणा में वर्ष 2016 में शिक्षक तबादला नीति लागू होने के बाद पहले जोन व्यवस्था बदली गई, फिर ब्लाक व्यवस्था आई और वह भी समाप्त हो गई। इस बदलाव के बीच जेबीटी को नियमित तबादले का अवसर नहीं मिला। जिला अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की शक्तियां हटने के बाद ग्रामीण विद्यालयों में जरूरत के अनुसार शिक्षक उपलब्ध कराने की गुंजाइश भी कम हुई। शिक्षक संगठनों के अनुसार कुछ विद्यालयों में इसका असर विद्यार्थियों की संख्या पर पड़ा है। प्राथमिक शिक्षकों के लिए आनलाइन तबादला पोर्टल भी अभी शुरू नहीं हुआ है।
हरियाणा रोडवेज में पदोन्नति के साल से बदला हिसाब
हरियाणा रोडवेज में करीब डेढ़ साल पहले निरीक्षक पद पर पदोन्नत कर्मचारियों के तबादले का प्रविधान है, जबकि करीब तीन साल पहले निरीक्षक बने कर्मचारियों का तबादला नहीं किया जा रहा। यानी पहले पदोन्नत हुए कर्मचारी तबादले के दायरे से बाहर हैं, जबकि बाद में पदोन्नत कर्मचारियों पर यह प्रावधान लागू हो रहा है। इसी अंतर को लेकर कर्मचारियों में असंतोष है। यूनियन ने आनलाइन नीति की खामियां दूर करने की मांग की है।
उम्र की मेरिट के नियम से वरिष्ठता का सवाल
नई नीति में उम्र के अंक आधे किए गए हैं। इससे कम उम्र में नियुक्त शिक्षक अधिक उम्र वाले शिक्षकों से मेरिट में आगे निकल सकते हैं। पदोन्नति के बाद पिछली सेवा को अनुभव में नहीं जोड़ने पर भी आपत्ति है। महिलाओं को 10 अंक और दंपती मामलों में 10 अंक देने की व्यवस्था को लेकर विद्यालयों के संतुलन पर भी सवाल उठे हैं।

