Haryana Government’s Decision : हरियाणा में ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों के निर्माण को लेकर सरकार द्वारा तीन साल बाद यूटर्न ले लिय है। तीन साल पहले यानी वर्ष 2023 में जिला परिषदों को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा सड़क निर्माण की जिम्मेदारी थी, लेकिन जिला परिषद सड़क निर्माण में कामयाब नहीं हो पाई। ऐसे में सरकार ने अपना फैसला वापस लेकर प्रदेश की 1114 सड़कों को वापस मार्केटिंग बोर्ड को सौंप दिया है।
वर्ष 2023 में सरकार ने फतेहाबाद, भिवानी, करनाल, पलवल और यमुनानगर में मार्केटिंग बोर्ड की 1,114 सड़कें जिला परिषदों को सौंपी गई थीं। साथ ही प्रत्येक जिले में बोर्ड का एक जेई और एक एसडीओ भी दिया गया था।
सरकार की समीक्षा में करनाल और पलवल में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने के बाद अब पांचों जिलों की सड़कें वापस मार्केटिंग बोर्ड को देने का निर्णय लिया गया है। जिला परिषदों को दिए गए जेई और एसडीओ को भी 30 सितंबर से पहले मार्केटिंग बोर्ड में लौट कार्यभार संभालने के निर्देश दिए।
करनाल के पत्र के बाद पलवल की भी हुई समीक्षा
करनाल के उच्च अधिकारियों ने सरकार से सड़कें वापस लेने का आग्रह किया। इसके बाद अन्य जिलों की समीक्षा हुई। पलवल में 123 सड़कों में 20 की विशेष मरम्मत के प्राक्कलन बने और 10 पर काम हुआ। यहां 25 करोड़ रुपये में से 15 करोड़ खर्च हुए। इसके बाद सरकार ने पांचों जिलों की सभी 1,114 सड़कें वापस मार्केटिंग बोर्ड को देने का निर्णय लिया।
फतेहाबाद में यह रही स्थिति
फतेहाबाद में 244 सड़कों में 110 की विशेष मरम्मत हुई और 15 की चौड़ाई 12 से बढ़ाकर 18 फुट की गई। यहां 60 करोड़ रुपये मंजूर हुए, जिसमें 48 करोड़ खर्च हुए। भिवानी में 183 सड़कों में 40 के प्राक्कलन स्वीकृत हुए और 35 पर काम हुआ। 50 करोड़ में से 40 करोड़ खर्च किए गए। यमुनानगर में 240 सड़कों में 40 के प्राक्कलन बने और 30 पर काम हुआ। 40 करोड़ में से 30 करोड़ खर्च हुए।
करनाल में 120 करोड़ मंजूर 20 करोड़ रुपये किए खर्च
करनाल में सबसे अधिक 324 सड़कें जिला परिषद को मिली थीं। 110 सड़कों के प्राक्कलन स्वीकृत हुए और 120 करोड़ रुपये मंजूर किए गए, लेकिन खर्च सिर्फ 20 करोड़ हो पाया। मार्केटिंग बोर्ड से भेजे गए जेई-एसडीओ का जिला परिषद अधिकारियों से तालमेल नहीं बैठा। कई बार तबादले के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी। बाद में पंचायत विभाग के जेई-एसडीओ को काम सौंपा गया, लेकिन तारकोल से जुड़े कार्य की तकनीकी जानकारी के अभाव में विशेष मरम्मत आगे नहीं बढ़ सकी।

