70’s Blockbuster Hindi Song: आकाश रूपी हिंदी संगीत जगत में स्वर कोकिला लता दीदी और सुरों के सरताज मोहम्मद रफी साहब का स्थान किसी ध्रुव तारे से कम नहीं है। हालांकि, हिंदी संगीत जगत के ये दोनों ही लीजेंड सिंगर हमारे बीच नहीं है लेकिन इनकी मधुर आवाज आज भी हमारे बीच ध्रुव तारे की तरह विराजमान है। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की आवाज में 55 वर्ष पहले बने हिंदी सिनेमा के इतिहास के सबसे बड़े पुराने मेलोडी गीत (Lata Mangeshkar song) को लोग आज भी भूल नहीं हैं।
जी हां…. हम 1971 में लता दीदी और रफी साहब की आवाज में बने कालजयी गीत ‘रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे’ मेलोडी गाने (old melody song) की कर रहे हैं। इस गाने की दिल को छू लेने वाली धुन आरडी बर्मन जी ने तैयार की थी। आज भी इस पुराने गाने की धुन बजाते ही सीधे हिंदी संगीत प्रेमियों के दिल में उतर जाती है।
70 के दशक में रेडियो पर इस कालजयी गीत को तेज वॉल्यूम में सुनते हैं लोग
70 के दशक में स्वर कोकिला लता मंगेशकर और रफी साहब के ब्लॉकबस्टर मेलोडी गीत (70’s blockbuster Hindi song) ‘रुत है मिलन की साथी मेरे आ रे’ कालजयी गीत को रेडियो पर बजते ही लोग रेडियो की वॉल्यूम बढ़ा देते थे। ‘रुत है मिलन की आ रे’ सदाबहार गाने (old evergreen song) को हिंदी संगीत जगत की स्वर सामग्री भारत रत्न लता मंगेशकर और सुरों के सरताज मोहम्मद रफी साहब (Mohammed Rafi) ने अपनी जादुई आवाज से ब्लॉकबस्टर बना दिया था।
‘रुत है मिलन की आ रे’ सुपरहिट पुराने हिंदी गाने को सुनने और पसंद करने वालों की संख्या 21वीं सदी में भी लाखों-करोड़ों में है। दो प्रेमियों के दिलों की दास्तान बयां करने वाला यह मेलोडी गीत (Bollywood old melody song) आज भी हिंदी संगीत प्रेमियों की गाड़ियों में खूब बजता है। इस सदाबहार हिंदी गाने की मधुर धुन पिछले 55 वर्षों से लगातार लोगों का मनोरंजन कर रही है।
‘रुत है मिलन की आ रे’ गाने में मुमताज और संजय खान ने किया था बेहतरीन अभिनय
70 के दशक में “मेला” फिल्म के लिए बनाए गए बॉलीवुड के ब्लॉकबस्टर गाने (blockbuster Bollywood song) ‘रुत है मिलन की आ रे’ में बॉलीवुड अभिनेत्री मुमताज और संजय खान के बेहतरीन अभिनेता की उसे जमाने में लोगों ने खूब तारीफ की थी। उस दौर में मुमताज (Mumtaj) की अदाकारी और खूबसूरती ने लोगों को दीवाना बना दिया था। 55 वर्ष पुराने ‘रुत है मिलन की आ रे’ गाने का क्रेज आज के दौर में भी कम नहीं हुआ है।
मुमताज की बेहतरीन अदाकारी और लता मंगेशकर के साथ रफी साहब की जादुई आवाज के बल पर यह गाना 5 दशकों से बॉलीवुड पर राज कर रहा है। प्रेमियों के दिलों की दास्तान बयां करने वाले इस कालजयी गीत के बोल मजरुह सुलतानपुरी (Majrooh Sultanpuri) जी द्वारा लिखे गए थे। यह गाना 1971 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘मेला’ के सबसे सुपरहिट गानों में से एक था।

