भारतीय शेयर बाजार में वीरवार दोपहर को कोहराम मच गया। शेयर मार्केट में सेंसेक्स और निफ्टी 50 लगातार निचले स्तर को छू रहे है। जहां पर शेयर मार्केट में निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। हालांकि सेंसेक्स और निफ्टी 50 सुबह सपाट पर खुले थे, लेकिन दोपहर के बाद से नीचे की तरफ रुख कर लिया।
मंगलवार व बुधवार को शेयर मार्केट में जो रिकवरी की थी, वहीं वीरवार को कुछ ही घंटों में समाप्त हो गई। इसके बाद शेयर मार्केट लगातार निचले स्तर को छू रही है। दोपहर 2 बजे तक शेयर मार्केट में सेंसेक्स 1100 अंक से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। जहां पर सेंसेक्स 71500 के नीचे ही कारोबार कर रहा है। इस दौरान भी सेंसेक्स का रुख नीचे की तरफ चल रहा था।
इसके चलते निवेशकों द्वारा मार्केट में लगातार बिकवाली की जा रही है। वहीं निफ्टी 50 की बात की जाए तो उसमें भी गिरावट का सिलसिला जारी है। जहां पर निफ्टी 50 में लगभग 380 अंकों से ज्यादा की गिरावट रही। निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा मौद्रिक नीति के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं, जबकि वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।
किन सेक्टर्स में आई तबाही?
सेक्टोरल प्रदर्शन में देखें तो निफ्टी ऑटो में 1.78 फीसदी, एफएमसीजी में 1.81 फीसदी, मीडिया में 1.71 फीसदी, मेटल में 3.23 फीसदी, फार्मा में 2.13 फीसदी, रियल्टी में 2.39 फीसदी, हेल्थकेयर में 2.21 फीसदी, तेल-गैस में 2.60 फीसदी और निफ्टी 500 हेल्थकेयर में 2.29 फीसदी की गिरावट है।
सुबह मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और केमिकल्स सेक्टरों में भी हल्की मजबूती देखने को मिली थी।
क्यों गिर रहा शेयर मार्केट
विश्लेषकों का कहना है कि आरबीआई द्वारा अपनाए गए ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ रुख और रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी के बाद इक्विटी बाजार के वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ गया है। ऊंची ब्याज दरों के कारण फिक्स्ड इनकम निवेश अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में निवेशकों का झुकाव फार्मास्यूटिकल्स जैसे उन क्षेत्रों की ओर बढ़ सकता है, जिन पर ब्याज दरों का प्रभाव अपेक्षाकृत कम होता है।
FII की तरफ से बिकवाली जारी
बाजार जानकारों के अनुसार, ऊंचे वैल्यूएशन के बावजूद ग्रोथ स्टॉक्स में निवेशकों की रुचि बनी हुई है, जबकि वैल्यू स्टॉक्स का प्रदर्शन अभी अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। उन्होंने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार बिकवाली और अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.3 प्रतिशत से ऊपर बने रहना बड़े शेयरों पर दबाव बनाए रख सकता है।

