success Story: कई बार लोग जीवन में मिलने वाली असफलताओं से हार मान जाते हैं, लेकिन कुछ लोग इन असफलताओं से सीख लेते हैं और अधिक मेहनत और पिछली कमजोरियों को दूर कर सफलता पाते हैं। ऐसी ही सफलता की कहानी है हरियाणा की बेटी वंदना फोगाट की। जो स्वयं अपने लिए तो प्रेरणा बनी है, साथ ही हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
वंदना फोगाट ने अपने लगातार प्रयास में यूपीएससी की कठिन परीक्षा को क्लियर करते हुए 28 वीं रैंक हासिल की और आज वे भारतीय वन सेवा यानी IFS सेवा में हैं। उनकी सफलता की कहानी हर किसी को प्रेरित कर रही है।
दरअसल वंदना फोगाट मूल रूप से हरियाणा के गुरुग्राम जिला के ग्रामीण क्षेत्र से आती हैं। उन्होंने हिंदी मीडियम से पढ़ाई की और ग्रामीण क्षेत्र से निकल कर देश की शीर्ष सेवा तक पहुंच गई। इसके पीछे सफलता और असफलता की कई कहानियां हैं।
वंदना फोगाट की कहानी ऐसे युवाओं को प्रेरणा दे रही है, जो कम संसाधन होने के बावजूद अपना संघर्ष जारी करते हैं। हालांकि इससे पहले वंदना फोगाट ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और कॉर्पोरेट में नौकरी की। फिर जीवन की सार्थकता साबित करने के लिए सीधे अपना बैग उठा कर यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली के मुखर्जी नगर पहुंच गई।
वंदना जितनी चर्चित भारतीय वन विभाग अधिकारी हैं, उनकी उतनी ही चर्चा फिटनेस फ्रीक महिला के रूप में भी है। वे अपने स्वास्थ्य के लिए काफी सजग रहती हैं और जिम में घंटों तक पसीना बहाती हैं। जिम में की जाने वाली एक्सरसाइज की फोटो भी वे अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर डालती रहती हैं।
गांव के स्कूल में की पढ़ाई
वंदना फोगाट का जन्म गुरुग्राम जिले के ग्रामीण क्षेत्र में एक साधारण परिवार में हुआ है। उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई गांव के स्कूल से ही पूरी की है। यहां से हिंदी मीडियम में पढ़ाई करने के बाद वे इंजीनियरिंग करने के लिए गुरुग्राम के एपीजे कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में पहुंची और यहां कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद उन्होंने प्रसिद्ध कंपनी एचसीएल में नौकरी की। करीब 2 साल तक नौकरी के बाद उनका मन सिविल सेवा की ओर हुआ। इसके चलते ही कठिन मेहनत कर सफलता पाई।
कुछ करने का जज्बा ले आया सिविल सेवा में
वंदना फोगाट हालांकि प्रसिद्ध कंपनी में अच्छी नौकरी कर रही थी, लेकिन उनके मन में कछ अधिक करने का जज्बा था। इसी के चलते वे यूपीएससी की ओर बढ़ी। जब वे मीडिया रिपोर्टस में सिविल सेवा टॉपर्स के इंटरव्यू पढ़ रही थी तो उनका भी मन हुआ कि यह परीक्षा दी जाए। वंदना फोगाट के अनुसार यह सिर्फ नौकरी के लिए नहीं अपनी क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की जिद थी।
न यूपीएससी का अनुभव न कोचिंग की गाइडेंस
वंदना फोगाट के परिवार व रिश्तेदारी में भी कोई यूपीएससी नहीं था। ऐसे में उन्होंने अपने लिए खुद ही रास्ता बनाने का फैसला लिया। फोगाट बताती हैं कि वे मुखर्जीनगर में कोचिंग ले रहे लोगों से पूछती रहती थी कि किस संस्थान में अच्छी कोचिंग मिलती है। हालांकि उन्होंने कठोर परिश्रम किया और पत्रिकाओं और अखबारों से अपने लिए सामग्री निकालनी शुरू कर दी।
असफल से मिली सफलता की चाबी
वंदना फोगाट बताती हैं कि शुरू में उन्होंने बहुत अधिक अध्ययन सामग्री जोड़ ली।
इसमें अलग-अलग कोचिंग संस्थानों के नोट्स, पत्रिकाएं और किताबें शामिल थी। इसके बाद उनको अपनी पढ़ाई में व्यवस्था बनाने में दिक्कत आ रही थी। ऐसे में पहले प्रयास के दौरान प्रीलिम्स करीब 1.5 अंक से चूक गईं।
इसके बाद उन्होंने अपनी रणनीति को बदला और अध्ययन सामग्री को व्यवस्थित कर 40-50 बार
रिविजन कर डाला। उन्होंने हर उस गलती को पहचाना जो बाधा बन रही थी। इसके बाद उन्होंने अपना फोकस भारतीय वन सेवा परीक्षा पर किया। इसके लिए फॉरेस्ट्री और जियोलॉजी जैसे वैकल्पिक विषयों के साथ आगे बढ़ी।
परिणाम स्वरूप तीसरे प्रयास में उनको 28वीं रैंक मिली। साथ ही इस बार इंटरव्यू के दौरान भी प्रदर्शन शानदार रहा और 207 अंक मिले। इसके लिए उन्होंने खास तैयारी की और अपनी मेहनत के बल पर सफलता की इबारत लिख डाली।

