Decision Old Pension Scheme : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा कर्मचारियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। यह फैसला पार्ट टाइम कर्मचारी के तैनात व बाद में नियमित होने पर उनको पुरानी पेंशन का लाभ देने के दिए है। हाईकोर्ट ने हरियाणा के कर्मचारियों के हक में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि नियमितीकरण से पहले की लगातार पार्ट टाइम, दैनिक वेतन, तदर्थ या अस्थायी सेवा को पेंशन के लिए अनिवार्य सेवा से बाहर नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी की बाद में नियमित नियुक्ति हुई है तो नियमितीकरण से पहले की सेवा को भी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ तय करते समय गिना जाएगा। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने शीलवती व अन्य की याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया।
1998 से पार्ट टाइम सेवा, 2014 में हुआ नियमितीकरण
हाईकोर्ट में चले केस के अनुसार शीलवती की नियुक्ति सात जुलाई 1998 को राजकीय प्राथमिक विद्यालय औरंगपुर/रामगढ़ ढाणी में वाटर कैरियर के तौर पर पार्ट टाइम दैनिक वेतन आधार पर हुई थी। इसके बाद 28 अगस्त 2014 को उन्हें नियमित किया गया। वह 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुईं।
दूसरी याचिका में एक कर्मचारी की पार्ट टाइम चपरासी के तौर पर नियुक्ति 27 सितंबर 2002 और दूसरे की 10 अक्टूबर 2002 को हुई थी। दोनों को अगस्त 2014 में नियमित किया गया। नियमितीकरण से पहले उन्होंने लगातार सेवा दी, इसलिए इस अवधि को भी पेंशन के लिए अर्हकारी सेवा माना जाना चाहिए।
सरकार ने भी पुराने फैसलों के आधार पर आपत्ति नहीं की
याचिकाकर्ताओं ने कई पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि नियमितीकरण से पहले की लगातार सेवा को पेंशन में शामिल किया जाना चाहिए। राज्य सरकार के वकील भी इन तथ्यों को खारिज नहीं कर सके और कहा कि यदि याचिकाओं में बताए गए तथ्य सत्यापन में सही पाए जाते हैं तो कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा।
तीन माह में दोबारा तय होंगे पेंशन लाभ
हाई कोर्ट ने याचिकाएं मंजूर करते हुए हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारियों की प्रारंभिक पार्ट टाइम, दैनिक वेतन या तदर्थ नियुक्ति से लेकर नियमितीकरण और उसके बाद की सेवा को पेंशन के लिए अनिवार्य सेवा माना जाए।

