बढ़ती महंगाई का असर ईंटों के भाव भी दिखाई देने लगा है। हरियाणा में अचानक ही ईंटों के भाव में रिकार्ड वृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण कोयले और मिट्टी के रेट में भारी बढ़ोतरी के साथ लेबर की लागत भी 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसका सीधा असर ईंटों की कीमत पर पड़ा है। झज्जर जिले में ईंटों के भाव अब 8500 से 9000 रुपए प्रति हजार तक पहुंच गए हैं।
वहीं, भट्ठों पर ए ग्रेड की ईंट करीब 7600 रुपए प्रति हजार और बी ग्रेड की ईंट करीब 6600 रुपए प्रति हजार में बिक रही हैं। भट्ठा संचालक लागत बढ़ने के चलते आने वाले समय में ईंटों के भाव में और बढ़ोतरी पर मंथन कर रहे हैं। झज्जर जिले में प्रदेश के सबसे ज्यादा ईंट भट्ठे संचालित होते हैं। वर्तमान में करीब 350 ईंट भट्ठे चल रहे हैं। इन भट्ठों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईंट पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन और कच्चे माल की बढ़ती कीमतें हैं।
लेबर की लागत भी 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ी
भट्ठा संचालकों के सामने सिर्फ मिट्टी और कोयले की महंगाई ही चुनौती नहीं है। मजदूरी में भी पिछले सीजन के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई हैं। ऐसे में ईंट उत्पादन की कुल लागत लगातार बढ़ रही है। संचालकों का कहना है कि अगर लागत इसी तरह बढ़ती रही तो ईंटों के मौजूदा भाव को बनाए रखना भी मुश्किल होगा।
कोयले के दाम में करीब 9 हजार रुपए प्रति टन की बढ़ोतरी
भट्ठा संचालक प्रवीण गुलिया के मुताबिक पिछले सीजन में कोयले का भाव करीब 12 से 13 हजार रुपए प्रति टन था। इस सीजन में यह बढ़कर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर करीब 22 हजार रुपए प्रति टन तक पहुंच गया है। कोयले की कीमत में इस बढ़ोतरी ने भट्ठों की उत्पादन लागत को सीधे प्रभावित किया है।
ईंट बनाने के लिए जरूरी मिट्टी के रेट में भी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। वर्तमान में करीब 20 लाख रुपए प्रति एकड़ में 3 फीट तक मिट्टी निकाली जा रही है। पिछले सीजन में यही रेट करीब 15 लाख रुपए प्रति एकड़ था। यानी मिट्टी के लिए भट्ठा संचालकों को पहले के मुकाबले करीब 5 लाख रुपए अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।
एनजीटी की गाइडलाइन का पड़ रहा असर
एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार ईंट भट्ठों के संचालन का सीजन 1 मार्च से 30 जून तक रहता है। इसके बाद अक्टूबर के आसपास कच्ची ईंटें बनाने का काम शुरू किया जाता है। कच्ची ईंटें तैयार होने के बाद अगले पकाई सीजन की शुरुआत होती है। ऐसे में भट्ठा संचालकों के लिए अगले सीजन की लागत और ईंटों के संभावित भाव को लेकर अभी से तैयारी शुरू हो गई है।
भट्ठा संचालकों का कहना है कि मिट्टी, कोयला और मजदूरी तीनों के रेट बढ़ने से उत्पादन लागत में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में आने वाले संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
झज्जर ईंट भट्ठा एसोसिएशन के चेयरमैन महावीर गुलिया ने कहा कि सरकार कुछ हद तक कोयला जलाने की सहूलियत दे। इससे यह पुराना उद्योग बना रहेगा। लगातार बढ़ती महंगाई मिट्टी और मजदूर के रेट बढ़ने से यह उद्योग चलाना मुश्किल हो रहा है। ऊपर से कोयला जलाने पर सरकार की रोक है ऐसे में सरकार कुछ हद तक कोयला जलाने की छूट ईंट भट्टा उद्योगों को दे ताकि यह उद्योग बना रह सके। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव आम लोगों पर पड़ेगा।

