Jind News: जींद जिले में धान की पराली से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए इस बार बिजली संयंत्र और बायोगैस द्वारा पराली खरीदने की योजना बनाई जा रही है। जिले में धान फसल की कटाई के सीजन को देखते हुए प्रशासन ने फसल अवशेष (पराली) के स्थायी प्रबंधन की दिशा में बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
शुक्रवार को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से जिले की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
उपायुक्त के निर्देशों पर यह बैठक कृषि उप निदेशक की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में पराली के औद्योगिक उपयोग और किसानों से सीधे खरीद की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान अधिकारयों ने बताया कि जिले में वर्तमान में 3 सीबीजी यानी बायोगैस प्लांट, 1 पराली आधारित बिजली संयंत्र तथा कई पैलेट व ब्रिकेट निर्माण इकाइयां सुचारू रूप से कार्य कर रही हैं।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अश्वनी धीमान ने औद्योगिक प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे किसानों के साथ सीधा समन्वय स्थापित कर अधिक से अधिक पराली की खरीद सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों द्वारा पराली के इस्तेमाल से जहां किसानों को
किसानों को मिलेगा आय का अतिरिक्त जरिया मिलेगा
बायोगैस और बिजली केंद्र द्वारा पराली खरीदने की फैसले के बाद किसने को आय का अतिरिक्त जरिया तो मिलेगा ही मिलेगा साथ ही साथ पराली जलाने की घटनाओं और उससे होने वाले वायु प्रदूषण पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी। बैठक में क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर नरेन्द्र पाल, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी ईश्वर दत्त, बोर्ड के एसडीओ अनिल कुमार तथा रिलायंस बायो एनर्जी के प्रतिनिधि रेशम सिंह सहित कई अन्य औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

