वॉयस ऑफ पानीपत (श्रद्धा गुप्ता ) – आईए जानते हैं क्या कारण हैं जिसके चलते मूवी ना थीएटर में रीलीज़ हुई औऱ अब OTT PLATFORM से भी हटा दी गई है । यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी है जो कि अमृतसर के एक सहकारी बैंक में काम करते थे । एक प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जिनका पंजाब के इतिहास में अहम रोल रहा , 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान पुलिस पर फर्जी मुठभेड़ों के आरोप लगे थे जहा खालड़ा ने श्मशान घाटों और नगर निगम के रिकॉर्ड खंगालकर दावा किया था कि पुलिस ने लगभग 25,000 शवों को ‘लावारिस’ बताकर उनका गुप्त अंतिम संस्कार कर दिया साथ ही खालड़ा ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया, जिसके बाद यह मामला CBI और कोर्ट तक पहुंचा जिसके बाद रहस्यमयी परिस्थितियों में उनका अपहरण कर हत्या कर दी गई थी । इसी पर ये पूरी फिल्म आधारित है और इसको लेकर पहला विवाद 2022 में हुआ इसके नाम पर इसी फिल्म का नाम पहले नरसंहार था जो कि बदलकर पंजाब 95 रख दिया गया और अब सतलुज
(CBFC) की आपत्ति के बाद इसका नाम बदला गया था औऱ साथ ही 127 कट्स की मांग भी की गई थी , ऐतिहासिक संदर्भों और पंजाब से जुड़े कई नामों को हटाने का सुझाव दिया था जिसके चलते फिल्म भारत में रिलीज नहीं हो सकी । फिर आखिरकार फिल्म का नाम ‘सतलुज’ रखकर 3 जुलाई 2026 को इसे बिना किसी कट (Uncut Version) के ZEE5 पर रिलीज किया गया था । लेकिन अब यहां भी फिल्म के लीड एक्टर दिलजीत दोसांझ ने फिल्म के OTT PLATFORM से हटने के बाद नाराज़गी जताई औऱ फिल्म को लेकर लोगों के रवैए और इंसानियत के खत्म होने पर दुख भी ज़ाहिर किया । फिलहाल ZEE 5 OTT PLATFORM का इस पर कहना है कि फिल्म से अच्छा रिस्पोन्स मिला लेकिन अभी के लिए इस फिल्म को रोक दिया गया है और सरकार के सूचना एंव प्रसारण मंत्रालय के अगले आदेश का इंतज़ार किया जाएगा ।
TEAM VOICE OF PANIPAT

