वॉइस ऑफ पानीपत(तमन्ना गोयल)
हरियाणा के IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक से जुड़े मामले मे CBI ने बड़ी कार्यवाही की हैं। CBI ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी सौरभ शर्मा को गिरफ्तार किया है जिसने सरकारी पैसो को ट्रांसफर कराने में अहम मदद की और CBI द्वारा पकड़े जाने के डर से सभी डिजीटल सबूतों को मिटाने की कोशिश की जिसके बाद कोर्ट ने उसे चार दिन की CBI रिमांड पर भेजा है जिससे CBI डिलीट हुए डाटा को रिकवर करने की कोशिश कर रही हैं ।
क्या है पूरा मामला?

आइ.डी. एफ. सी . बैंक
दरअसल यह मामला बैंक स्कैम मामले का है जहां हरियाणा के 8 सरकारी विभागों और चंडीगढ़ के सेक्टर -32 में स्थित IDFC बैंक से सरकारी फंड के पैसो को फर्जी खाते बनाकर शेल कंपनियो को ट्रांसफर कर दिया गया। और यह काम अकेले नही किया गया बल्कि इस मामले मे हरियाणा सरकार के अधिकारी और 7 बड़े IAS अफ़सरो की भी मिलीभगत बताई जा रही हैं। इस मामले मे पहले ही दो IAS अफ़सरो पंकज अग्रवाल और आरके सिंह को भी गिरफ्तार किया जा चुका हैं।
घोटोले की जांचः
सीबीआई ने रिमांड पर लिए दो IAS अफ़सरो से इस मामले पर पूछताछ की हैं। साथ ही CBI की तकनीकी टीम ने बैंक अधिकारियों और अन्य लोगो के बीच हुई पूछताछ के दौरान अधिकारियों द्वारा डिलीटेड डिजीटल डाटा और बातचीत को भी रिकवर कर लिया हैं। और अब इनकी फॉरेंसिक जांच जारी है। जिस दौरान नरेश और विक्रम वधावा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया जिन्होने इस घोटाले मे बिचौलिए का काम किया। हरियाणा सरकार ने अभी 556 करोड़ का मूलधन रिकवर कर लिय़ा है। CBI अब अपने पास मौजूद दस्तावेजी सबूतो और बैंक रिकार्ड की जांच कर रही है। साथ ही आगे और अधिकारियो की पूछताछ और नए खुलासे किए जाएंगे। जांच एजेंसियो की ओर से अभी कोई पुष्टि नही हुई है।एजेंसी अंदेशा लगा रही है कि इस मामले में और IAS अफसरों की भूमिका हो सकती है।
TEAM VOICE OF PANIPAT

