Haryana Controlled Area : हरियाणा में मास्टर प्लान 2041 के तहत शहरों का भविष्य का प्लान तैयार किया जा रहा है। इस प्लान में हरियाणा के कई शहरों के आसपास के गांवों की जमीन भी इन प्लान में शामिल हो रही है। पहले जहां पर इन गांवों में फ्री जोन था और लोग अपनी मर्जी से निर्माण कर सकते है, लेकिन अब हरियाणा सरकार ने गांवों की जमीन को भी कंट्रोल एरिया में शामिल करना शुरू कर दिया है।
इसी कड़ी में हरियाणा के पानीपत कुल 1,268 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का करीब 35 प्रतिशत (443.8 वर्ग किलोमीटर) हिस्सा जो अब तक फ्री जोन में है, लेकिन अब यह एरिया कंट्रोल में आने वाला है। ऐसे में पानीपत जिले के 72 गांवों कंट्रोल एरिया में आ जाएंगे। डीटीपी ने इसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) मुख्यालय और प्रदेश सरकार को भेज दिया है। अब पूरे जिले में बिना सीएलयू और डीटीपी की हरी झंडी के न तो कोई नई फैक्ट्री लग सकेगी और न ही बिना नक्शा पास कराए कोई पक्का निर्माण हो सकेगा।
53 औद्योगिक इकाइयों का काम रुकवाया
16 सितंबर को डीटीपी ने मतलौडा के 10 गांवों को अपने कंट्रोल्ड एरिया में ले लिया था। नोटिफिकेशन जारी होने के अगले ही दिन विभाग की टीम ने इन गांवों में पहुंचकर निर्माणाधीन 53 औद्योगिक इकाइयों का काम पूरी तरह से रुकवा दिया था। अब टाउन प्लानिंग की टीम ने यहां फिजिकल सर्वे शुरू कर दिया है। इसके साथ ही डीटीपी एन्फोर्समेंट द्वारा जल्द ही ड्रोन सर्वे भी करवाया जाएगा, ताकि दोनों वेरिफिकेशन रिपोर्ट का मिलान कर वस्तुस्थिति स्पष्ट की जा सके।
पानीपत के ये 72 गांव अब आ जाएंगे कंट्रोल्ड एरिया मे
यमुना किनारे (35 गांव): संजोली, गोयला खुर्द, भलोर, गोयला खेड़ा, मिर्जापुर, जलमाना, अधमी, नन्हेड़ा, रिसपुर, सनौली के तामशाबाद, नवादा आर, नवादा पार, कुंडला, राणा माजरा और बराना सहित अन्य सभी आसपास के क्षेत्र।
मतलौडा-इसराना (27 गांव): रेरकलां, धर्मगढ़, कवी, जोशी, उरलाना खुर्द, अदियाना, सुताना, उरलाना कलां, सौंक, पाथरी, छिछराना, अहर, कुराना से लेकर जींद सीमा तक के गांव। वहीं बांध, बुआना लाखु, पलड़ी, मांडी सहित सभी क्षेत्र।
समालखा-बापौली (10 गांव): राक्सेड़ा, बशारा, फिरोजपुर, हधवाला, भनौली, बिलासपुर, खोजकीपुर, मतरौली, रायमल और पत्थरगढ़।
कंट्रोल्ड एरिया में आने के बाद क्या होंगे नियम
सीएलयू अनिवार्यः निर्माण या उद्योग शुरू करने से पहले सीएलयू लेना होगा।
मास्टर प्लान के अनुसार जोनिंगः उद्योग केवल वहीं लगेगा जो मास्टर प्लान में इंडस्ट्रियल जोन के तहत आती हो।
नक्शा और एफएआरः साइट लेआउट और बिल्डिंग प्लान स्वीकृत कराना होगा। एफएआर (कवर एरिया), पार्किंग और चारों तरफ तय जगह छोड़ना जरूरी है।
सड़क की चौड़ाईः प्लॉट तक पहुंचने के लिए न्यूनतम निर्धारित चौड़ाई वाली अप्रोच रोड होनी चाहिए।

