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September 29, 2026
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गांव बिकाऊ है, कीमत सिर्फ पानी! इस गांव की दर्दभरी कहानी ने सबको चौंकाया

A heart-wrenching story of the village

heart-wrenching story village : देश में विकास के लिए खेती योग्य भूमि का अधिग्रहण होते हुए देखा होगा, लेकिन जहां पर गांव के आवास है और उनको एक साथ बिकते नहीं देखा होगा, लेकिन ऐसा ही महाराष्ट्र के एक गांव में अनोखा काम हुआ है। गांव में पानी की किल्लत से परेशान होकर ग्रामीणों ने गांव को बेचने के लिए बैनर तक लगा दिए।

यह गांव एक-एक बूंद के लिए तरस रहा है। जहां पर खेतों में फसल सूख गई और पीने के लिए बनाए गए कुएं भी सूख गए है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने एक अनोखा बैनर लगाया है, जिस पर लिखा है ‘गांव बिकाऊ है’। इस गांव को खरीदने के बदले में ग्रामीणों ने कीमत केवल सिर्फ पानी मांगा है। ग्रामीणों द्वारा लगाए गए इस बैनर को देखकर हर कोई हैरान है, लेकिन पानी की कमी के चलते इस गांव की कहानी पूरी तरह से दर्दभरी है।

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के माढ़ा तहसील के अंतर्गत् आने वाले गांवातुलशी की आबादी करीब सात हजार है। देश व प्रदेश में सरकार द्वारा पेयजल व खेतों के लिए पानी देने के लिए अनेक सरकारी योजनाएं बनाई, लेकिन आज तक गांव में पानी की बूंद नहीं पहुंची। हालांकि महाराष्ट्र सरकार द्वारा इस गांव के लिए ‘सीना-माढ़ा लिफ्ट सिंचाई योजना’ भी बनाई, लेकिन खुदाई काम काफी समय से अधूरा पड़ा है। इसके कारण यह गांव कई साल से सूखा पड़ा हुआ है। ऐसे में गांव की पेयजल का काम भी पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर होने के लिए मजबूर हैं।

पानी की कीमत पर गांव बेचने का लगाया बैनर

गांव तुलशी के सरपंच शरद मोरे ने गांव की दर्दभरी कहानी सुनाते हुए कहा कि गांव के पास से ही नहर निकलती है, लेकिन उनका गांव वर्षों से प्यासा है। सरकार ने उनके लिए सीना-माढ़ा योजना भी बनाई लेकिन हमें इसका कोई फायदा नहीं मिलता। ‘गांव बिकाऊ है, कीमत: पानी’ का बोर्ड लगाकर हम सरकार का ध्यान अपनी लाचारी की ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने कहा कि 14 सितंबर को भूख हड़ताल शुरू की थी और बाद में माढ़ा तहसील कार्यालय के बाहर ‘थाली-नाद’ यानी थाली बजाकर प्रदर्शन किया। सरपंच मोरे ने पहले बताया था कि सीना-माढ़ा योजना के सातवें और आठवें निकासी मार्ग के पास लगभग 800 मीटर की खुदाई का काम पिछले 26 वर्षों से अधूरा पड़ा है।

पानी नहीं होने से गांव में कंवारों की बनी फौज

ग्रामीणों कहा कहना है कि पानी की किल्लत के चलते उनकी निजी जिंदगी भी पर असर पड़ रहा है। पानी नहीं होने के कारण गांव के कई युवाओं की शादियां नहीं हो पा रही हैं। मोरे ने दावा किया कि तुलशी गांव के लगभग 350 युवा अविवाहित हैं, क्योंकि पानी की भीषण किल्लत को देखते हुए कोई भी अपनी बेटी का रिश्ता यहां करने को तैयार नहीं होता।

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