September 25, 2026
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Haryana: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की 3 दिन की हड़ताल स्थगित, मंत्री अनिल विज से बैठक के बाद समझौता

Haryana News: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल फिलहाल टल गई है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज के साथ यूनियन नेताओं की करीब 5 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हुआ। यूनियन नेताओं ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए दो महीने का समय दिया है।

बैठक में ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन हिसार, हरियाणा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड कर्मचारी संघ भिवानी, हरियाणा पावर इंजीनियर एसोसिएशन, हरियाणा पावर कॉरपोरेशन SC/ST एवं BC कर्मचारी यूनियन और डिप्लोमा इंजीनियर एसोसिएशन समेत कई कर्मचारी संगठनों के 10 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए।

यूनियन नेताओं ने बैठक में स्पष्ट किया कि वे केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर हड़ताल वापस नहीं लेंगे। इसके बाद मांगों और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों को लिखित रूप में लिया गया। सहमति बनने के बाद हड़ताल को फिलहाल स्थगित कर दिया गया।

हड़ताल की तैयारी में जुटा था बिजली निगम

हड़ताल की आशंका को देखते हुए बिजली निगम ने पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी थी। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) ने बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए दूसरे राज्यों के बिजली विभागों और बिजली वितरण कंपनियों से तकनीकी कर्मचारियों की व्यवस्था करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

UHBVN के चीफ इंजीनियर/एडमिनिस्ट्रेशन (कोऑर्डिनेशन) की ओर से संबंधित अधिकारियों को दूसरे राज्यों से अधिक से अधिक तकनीकी स्टाफ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

JE से लेकर SA तक के कर्मचारियों की थी जरूरत

कंटीजेंसी प्लान के तहत बिजली निगम को JE, AFM, LM, ALM, SSA, ASSA और SA स्तर के तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत बताई गई थी। हड़ताल की स्थिति में इन कर्मचारियों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात कर बिजली आपूर्ति बनाए रखने की योजना थी।

निगम ने संबंधित अधिकारियों को दूसरे राज्यों के बिजली विभागों और डिस्कॉम से अधिकतम तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। हालांकि अब हड़ताल स्थगित होने के बाद इस वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत कितनी रहेगी, यह आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा।

गुरुग्राम-नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण लाइसेंस का विरोध

बिजली कर्मचारियों की नाराजगी के पीछे कई मुद्दे हैं। इनमें सबसे प्रमुख गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का मामला है।

एक निजी कंपनी ने इन क्षेत्रों में बिजली वितरण के लिए हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) के समक्ष लाइसेंस की औपचारिक याचिका दायर की है। आवेदन विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 15 के तहत दाखिल किया गया है।

कर्मचारी संगठन इसे बिजली क्षेत्र में निजीकरण की दिशा में कदम मान रहे हैं और इसका विरोध कर रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) समेत संबंधित सरकारी बिजली कंपनियां इस आवेदन का विरोध कर चुकी हैं और अभी इस मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

इलेवन पावर ने भी दिया है लाइसेंस का आवेदन

गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी क्षेत्र की ओर से एक से अधिक आवेदन सामने आए हैं। इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने भी 12 मई को लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। HERC ने 26 मई को आवेदन को सुनवाई योग्य मानते हुए स्वीकार किया था। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई हुई।

अगर निजी कंपनियों को लाइसेंस मिलता है तो गुरुग्राम और नूंह में सरकारी कंपनी DHBVN के साथ निजी कंपनी भी बिजली वितरण कर सकेगी। कर्मचारी संगठन इसी संभावित व्यवस्था को लेकर विरोध जता रहे हैं।

स्मार्ट मीटर को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी

बिजली कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर रोक भी शामिल है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि स्मार्ट मीटर और बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका आगे चलकर निजीकरण को बढ़ावा दे सकती है।

सरकार की ओर से बताया गया है कि स्मार्ट मीटर के टेंडर से संबंधित फाइल प्रक्रिया में है और अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

बिजली कंपनियों की शेयर बाजार में लिस्टिंग का भी विरोध

यूनियनों ने HPGCL, HVPNL और बिजली वितरण कंपनियों को स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट करने की प्रक्रिया का भी विरोध किया है। इसके साथ ही HVPNL में TBCB प्रोजेक्ट को रोकने की मांग उठाई गई है।

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि इस तरह के कदम बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता खोल सकते हैं। इसी वजह से यूनियनें इन फैसलों के खिलाफ लगातार आवाज उठा रही हैं।

बिजली कर्मचारियों की नाराजगी सिर्फ निजीकरण से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं है। कई पुरानी सेवा संबंधी मांगें भी लंबे समय से लंबित हैं।

इनमें Ex-Gratia Policy में बदलाव, कर्मचारियों की पदोन्नति और पुनर्गठन, खाली पदों को भरना, ऑनलाइन ट्रांसफर व्यवस्था खत्म करना, टाइप टेस्ट जल्द कराना और महिला कर्मचारियों के लिए क्रेच सुविधा जैसी मांगें शामिल हैं।

इसके अलावा कर्मचारियों ने जोखिम भत्ते, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण और ड्यूटी के दौरान सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की भी मांग उठाई है।

अब दो महीने में कार्रवाई का इंतजार

ऊर्जा मंत्री अनिल विज और कर्मचारी यूनियनों के बीच लिखित समझौते के बाद फिलहाल हड़ताल स्थगित हो गई है। यूनियनों ने सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए दो महीने का समय दिया है।

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