IAS Success Story: अक्सर लोगों को यह कहते हुए सुना जाता है कि शादी और बच्चे होने के बाद महिलाओं के लिए अपने करियर पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है। परिवार और जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पूरा करने का समय नहीं मिल पाता। लेकिन केरल की मालविका ने इन धारणाओं को गलत साबित कर दिखाया।
मालविका ने न सिर्फ शादी और बच्चे के बाद अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि बच्चे को जन्म देने के महज 17 दिन बाद UPSC सिविल सेवा की मेन्स परीक्षा दी और सफलता हासिल की। उन्होंने UPSC Civil Services Examination 2024 में 45वीं रैंक हासिल कर मिसाल कायम की।
उनकी कहानी उन महिलाओं के लिए खास प्रेरणा है, जो परिवार की जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों को भी पूरा करना चाहती हैं।
प्रेग्नेंसी के दौरान दी UPSC प्रीलिम्स परीक्षा
मालविका ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 की तैयारी के दौरान प्रेग्नेंसी की चुनौती का भी सामना किया। उन्होंने गर्भावस्था के दौरान ही UPSC प्रीलिम्स परीक्षा दी और इसे सफलतापूर्वक पास किया।
प्रीलिम्स के बाद उनके सामने मेन्स परीक्षा की तैयारी की चुनौती थी। इस दौरान वह प्रेग्नेंट थीं, लेकिन उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। परिवार ने भी उनका पूरा साथ दिया, जिससे वह अपनी तैयारी जारी रख सकीं।
डिलीवरी के 17 दिन बाद दी मेन्स परीक्षा
मालविका की कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि उन्होंने बच्चे को जन्म देने के महज 17 दिन बाद UPSC मेन्स परीक्षा दी।
डिलीवरी के बाद शरीर को सामान्य होने में समय लगता है और इस दौरान आराम की जरूरत होती है। इसके बावजूद मालविका ने हिम्मत नहीं हारी और परीक्षा में शामिल हुईं।
मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग के दम पर उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि 45वीं रैंक हासिल कर अपने सपने को साकार किया।
पहले भी पास कर चुकी थीं UPSC परीक्षा
मालविका का UPSC का सफर नया नहीं था। वह इससे पहले भी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर चुकी थीं।
उन्होंने 2019 में UPSC परीक्षा में 118वीं रैंक हासिल की थी। इसके बाद 2022 में 172वीं रैंक प्राप्त की। हालांकि, मालविका अपनी रैंक से संतुष्ट नहीं थीं और उन्होंने बेहतर रैंक के लिए अपनी तैयारी जारी रखने का फैसला किया।
इसी दौरान उनकी शादी हो गई, लेकिन शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ाई और UPSC की तैयारी नहीं छोड़ी। परिवार की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपने लक्ष्य पर काम जारी रखा।
शारीरिक रूप से कमजोर थीं, फिर भी नहीं मानी हार
मालविका ने एक इंटरव्यू में बताया कि इस दौरान वह शारीरिक रूप से कमजोर महसूस कर रही थीं। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बीच परीक्षा की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था।
हालांकि, उन्होंने अपनी परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। परिवार के सहयोग और अपने मजबूत इरादों के बल पर उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और आखिरकार सफलता हासिल की।
पति भी हैं IPS अधिकारी
मालविका को अपने परिवार से पूरा सहयोग मिला। उनके पति भी IPS अधिकारी हैं। परिवार के सहयोग ने उन्हें पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी के दौरान काफी मदद दी।
मालविका की कहानी यह बताती है कि शादी और मातृत्व किसी महिला के सपनों का अंत नहीं हैं। सही सहयोग, इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच भी अपने लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

