वॉयस ऑफ पानीपत ( हिमांशी चावला ) – देश में बिना इंश्योरेंस चलने वाले वाहनों पर लगाम लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अनोखा और सख्त कदम उठाया है। जिसमें सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल ओर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को एक विशेष पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने को कहा है। साथ ही यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद, देश के पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के इंश्योरेंस डेटाबेस से लिंक कर दिया जाएगा साथ ही यह भी बताया कि आगर किसी थर्ड पार्टी का वाहन इंश्योरेंस वेलिड नहीं होगा तो पेट्रोल पंप संचालक उसे व्यक्ति को पेट्रोल देने से मना कर देंगे। साथ ही कोर्ट ने आम जनता को थोड़ी राहत देते हुए नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड पार्टी इंश्योरेंस की समय सीमा को भी आगे बढ़ा दिया है। इस कदम से सड़को पर बिना बीमे वाली वाहनों की संख्या में भारी कमी आने की उम्मीद है।

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आइए विस्तार से जानते है कोर्ट का क्या निर्देश है और यह कैसे लागू होगा और साथ ही आम जनता पर इसका क्या असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने पेट्रो डीज़ल और गाड़ियों के इंश्योरेंस को लेकर केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने कई निर्देश दिए है।इसके साथ ही कोर्ट ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के हित में नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य इंश्योरेंस की अवधि को 1 साल और बढ़ा दिया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आगर किसी गाड़ी का बीमा वेलिड नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप उसे पेट्रोल या डीजल देने से मना कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने देश में बिना बीमा वाले वाहनों की बढ़ती संख्या और सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों को समय पर मुआवजा न मिलने की समस्या को देखते हुए कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट के सामने पेश आंकड़ों के अनुसार, देश में चलने वाले लगभग 56% वाहनों का बीमा नहीं है, जबकि स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस (2024-25) की रिपोर्ट भी बताती है कि ऐसे मामलों में पीड़ितों और उनके परिवारों को उचित मुआवजा पाने के लिए लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को मिलकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत पेट्रोल पंपों, प्रमुख सड़कों और टोल प्लाजा पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे। ये कैमरे वाहन के नंबर को VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) के डेटाबेस से जोड़कर तुरंत बीमा की स्थिति जांचेंगे। साथ ही, राज्य पुलिस को ऐसे मोबाइल ऐप या हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराने की भी बात कही गई है, जिससे मौके पर ही वाहन का बीमा सत्यापित कर ई-चालान जारी किया जा सके। कोर्ट ने नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि भी बढ़ा दी है, जिसके तहत अब नई कारों के लिए 4 वर्ष और नई बाइक या स्कूटी के लिए 6 वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा लेना जरूरी होगा। इसके अलावा, वाहन मालिकों को उनकी जरूरत के अनुसार बेस थर्ड-पार्टी कवर, पर्सनल एक्सीडेंट कवर, ओन-डैमेज और अन्य एड-ऑन विकल्प उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में इससे तीसरे पक्ष को हुए नुकसान की भरपाई होती है और पीड़ितों को आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
TEAM VOICE OF PANIPAT

