Solar Panel: बढ़ते बिजली बिलों के बीच अब बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में सोलर सिस्टम लगवाने की ओर रुख कर रहे हैं। यदि आप भी 3kW का सोलर सिस्टम लगाने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि यह प्रतिदिन कितनी बिजली पैदा करता है, इससे कौन-कौन से घरेलू उपकरण चलाए जा सकते हैं और इसे लगाने में कितना खर्च आता है।
रोज कितनी बिजली बनाता है 3kW का सोलर सिस्टम?
भारत में सामान्य परिस्थितियों में 3kW का सोलर सिस्टम प्रतिदिन करीब 12 से 15 यूनिट (kWh) बिजली पैदा करता है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन आपके शहर, मौसम और मिलने वाली धूप पर निर्भर करता है। गर्मियों में तेज धूप के दौरान यह 15 यूनिट या उससे अधिक बिजली भी बना सकता है।
यदि किसी घर की मासिक बिजली खपत 300 से 500 यूनिट के बीच है, तो 3kW का सोलर सिस्टम बिजली का बिल काफी हद तक कम कर सकता है। कई मामलों में नेट मीटरिंग के साथ बिल लगभग शून्य तक भी पहुंच सकता है।
महीने और साल में कितना बिजली उत्पादन होता है?
3kW क्षमता वाला सोलर सिस्टम एक महीने में लगभग 360 से 450 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। वहीं, पूरे वर्ष में इसका कुल उत्पादन 4,200 से 5,400 यूनिट तक पहुंच सकता है।
सरकार की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं का लाभ लेने पर इसकी शुरुआती लागत भी कम हो जाती है। एक बार इंस्टॉल होने के बाद यह सिस्टम करीब 25 वर्ष तक बिजली उत्पादन करने में सक्षम रहता है और इसका रखरखाव भी अपेक्षाकृत कम होता है।
मौसम के अनुसार कितना बदलता है बिजली उत्पादन?
सोलर सिस्टम का प्रदर्शन मौसम के अनुसार बदलता रहता है। गर्मी में 12 से 15 यूनिट प्रतिदिन, सर्दी में 10 से 12 यूनिट प्रतिदिन, मानसून में 8 से 12 यूनिट प्रतिदिन बिजली बनाता है।
बारिश और बादलों के कारण उत्पादन घट सकता है, लेकिन पूरे साल का औसत उत्पादन सामान्य घरेलू जरूरतों के लिए पर्याप्त माना जाता है।
3kW सोलर सिस्टम से कौन-कौन से उपकरण चल सकते हैं?
अच्छी धूप मिलने पर 3kW का सोलर सिस्टम एक सामान्य परिवार की अधिकांश बिजली जरूरतें पूरी कर सकता है। इससे सामान्य रूप से 2 से 3 पंखे, 8 से 10 एलईडी लाइट, एक रेफ्रिजरेटर, एक टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, कूलर, दिन के समय छोटी क्षमता का एयर कंडीशनर, पानी की मोटर, लैपटॉप और मोबाइल चार्जर जैसे उपकरण चलाए जा सकते हैं।
हालांकि, 1.5 टन का एयर कंडीशनर कई घंटों तक लगातार चलाने जैसे भारी लोड के लिए यह क्षमता सीमित हो सकती है।
ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड सिस्टम में क्या अंतर है?
ऑन-ग्रिड सिस्टम सीधे बिजली ग्रिड से जुड़ा होता है और इसमें बैटरी नहीं होती। दिन में बची अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग के जरिए ग्रिड में भेजी जा सकती है, जिससे बिजली बिल में और अधिक बचत होती है।
वहीं, ऑफ-ग्रिड सिस्टम में बैटरी लगी होती है, इसलिए बिजली कटने की स्थिति में भी बैकअप मिलता है। हालांकि, बैटरी के कारण इसकी कीमत ऑन-ग्रिड सिस्टम की तुलना में अधिक होती है।
कितनी जगह और कितना खर्च आता है?
3kW का सोलर सिस्टम लगाने के लिए छत पर लगभग 180 से 250 वर्ग फीट खुली और बिना छाया वाली जगह की आवश्यकता होती है।
लागत की बात करें तो ऑन-ग्रिड 3kW सिस्टम सरकारी सब्सिडी के बाद लगभग 1.5 लाख रुपये तक और ऑफ-ग्रिड 3kW सिस्टम बैटरी सहित लगभग 2.4 लाख रुपये से 3 लाख रुपये तक पड़ेगा।

