रेलवे विभाग द्वारा रेल लाइन को अपग्रेड करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। रेलवे विभाग द्वारा दो रेल लाइन को अपग्रेड किया जाएगा, ताकि ट्रेनों में यात्रियों को लगने वाले झटकों से राहत मिल सके। इन रेल लाइन का अपग्रेड होने के बाद यात्रियों का सफर सुहाना होने वाला है।
रेलवे विभाग के अनुसार हिसार-सादुलपुर और रेवाड़ी सादुलपुर रेलखंड की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए दोनों रेल लाइनों पर 66 सेट एसईने (स्विच एक्सपेंशन जॉइंट) बदलेगा। इसके लिए करीब 3.51 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। लूप लाइन पर ट्रेन के आने-जाने और खड़े होने के दौरान ट्रैक पर लगातार दबाव पड़ता है। ऐसे में पुराने एसईने को समय पर बदलना ट्रैक की सुरक्षा के लिहाज से जरूरी माना जाता है।
एसईजे रेल की पटरियों के बीच ऐसा महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जो तापमान में बदलाव के कारण रेल के फैलने और सिकुड़ने की स्थिति में ट्रैक को सुरक्षित रखने में मदद करता है। लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद इसके हिस्सों में घिसावट आने पर ट्रैक की स्थिति प्रभावित हो सकती है। रेलवे इसी वजह से निर्धारित मानकों के अनुसार पुराने एसईजे को बदलने का काम करेगा।
इंजीनियरिंग टीम ट्रैक की स्थिति जांचेगी
रेलवे की योजना हिसार-सादुलपुर और रेवाड़ी-सादुलपुर सेक्शन में चिह्नित लूप लाइनों पर 66 एसईजे सेट बदलने की है। हर स्थान पर पुराने एसईजे को हटाकर निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार नया एसईजे लगाया जाएगा। काम के दौरान रेलवे की इंजीनियरिंग टीम ट्रैक की स्थिति की जांच भी करेगी।
मुख्य लाइन पर नवीनीकरण की जरूरत
लूप लाइनों के एसईजे बदलने के बाद मुख्य लाइन पर भी ट्रैक और इससे जुड़े सुरक्षा उपकरणों की स्थिति की नियमित निगरानी जारी रहेगी। जहां उपकरण निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं या तकनीकी मानकों के अनुसार बदलने की जरूरत होगी, वहां रेलवे चरणबद्ध तरीके से नवीनीकरण कर सकता है।
लूप लाइन पर ट्रेनों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका
हिसार-सादुलपुर और रेवाड़ी-सादुलपुर रेलखंड पर कई जगह लूप लाइन का इस्तेमाल ट्रेनों को क्रॉस कराने, किसी ट्रेन को कुछ समय के लिए रोकने या दूसरी ट्रेन को आगे निकालने के लिए किया जाता है। इसलिए इन लाइनों पर ट्रैक के हर हिस्से की मजबूती जरूरी है। 66 एसईजे बदलने के बाद लूप लाइन का ट्रैक ज्यादा सुरक्षित और बेहतर स्थिति में रहेगा।
इसका सीधा फायदा ट्रेन संचालन में मिलेगा। एसईजे की स्थिति बेहतर होने से ट्रैक पर अनावश्यक झटकों और असमानता की समस्या कम करने में मदद मिलेगी। इससे ट्रेनों को लूप लाइन में प्रवेश और निकास के दौरान सुरक्षित तरीके से संचालन में सुविधा होगी।

