हरियाणा में धान खरीद के नियम बदल गए है। अब किसान अपनी धान की फसल को केवल अपने जिले की मंडी में ही बेच सकते है। अगर दूसरे जिले की अनाज मंडी में धान लेकर गए तो वहां पर उसकी खरीद नहीं होगी। धान खरीद के इस निए के बाद दूसरे जिले की मंडियों में धान लेकर पहुंचे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
अब किसान दूसरे जिले की मंडी में अपनी फसल नहीं बेच सकेंगे। खरीद के लिए उसी जिले की मंडी में जाना होगा, जहां उनकी फसल दर्ज है। इस नियम के चलते झज्जर से धान लेकर रोहतक की नई अनाज मंडी पहुंचे किसानों को ई-गेट पास नहीं मिल रहा।
किसानों का कहना है कि पहले वे किसी भी मंडी में फसल बेच सकते थे। उधर, आवक के मुकाबले खरीद धीमी होने से किसानों को कई दिन मंडी में रुकना पड़ रहा है।
मौसम में बदलाव और वर्षा की आशंका ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। खुले में रखे धान को तिरपाल से ढककर बचाया जा रहा है। किसानों को आशंका है कि वर्षा से फसल भीगी तो नमी बढ़ने के कारण खरीद में परेशानी आ सकती है। लंबे इंतजार से ट्रैक्टर-ट्राली का खर्च भी बढ़ रहा है।
गेट पास के लिए ये शर्ते जरूरी
किसान सहायता केंद्र के निर्देशानुसार, वाहन की फ्रंट नंबर प्लेट अनिवार्य है। गेट पास के लिए फोटो सत्यापन और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पास सुबह छह बजे से रात आठ बजे तक जारी किए जाएंगे। खरीद या नियमों से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए किसान मार्केट कमेटी में संपर्क कर सकते हैं।
वेयर हाउस के डीएम रोहताश कुमार ने बताया कि नई गाइडलाइंस में किसानों की सुविधा का ध्यान रखा गया है। किसान अपने जिले की मंडी में धान बेच सकेंगे। हालांकि, एक-दो मामलों में दूसरे जिले की मंडी में फसल बेचने की छूट दी गई है।

