August 4, 2026
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Haryana: हरियाणा की JBT भर्ती का विवाद 25 साल बाद हुआ खत्म, 160 अभ्यर्थियों को मिलेगी नियुक्ति

Haryana News: करीब 25 वर्षों से लंबित वर्ष 1999 की 3,206 जेबीटी (JBT) भर्ती विवाद का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के समाधान प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सभी लंबित अपीलों का निपटारा कर दिया। फैसले के तहत दो दशक से अधिक समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की नियुक्तियां बरकरार रहेंगी, जबकि शैक्षणिक मेरिट के आधार पर चयन क्षेत्र में आने वाले लगभग 160 अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नई नियुक्ति दी जाएगी।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार के रुख को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि सभी पक्ष इस समाधान पर सहमत हैं। ऐसे में सभी लंबित अपीलों का निपटारा इसी आधार पर किया जाता है।

20 साल से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता संजीव कौशिक ने अदालत को बताया कि वर्ष 1999 की भर्ती के तहत नियुक्त शिक्षक पिछले दो दशकों से अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। इनमें कई कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। ऐसे में उनकी नियुक्तियां रद्द करने से शिक्षा विभाग के कामकाज पर गंभीर असर पड़ेगा और प्रशासनिक कठिनाइयां उत्पन्न होंगी। इसी वजह से सरकार ने उनकी सेवाएं यथावत रखने का फैसला किया है।

लगभग 160 अभ्यर्थियों को मिलेगी नियुक्ति

सरकार ने अदालत को बताया कि 8 जनवरी 2014 के एकल पीठ के फैसले से लाभान्वित 221 याचिकाकर्ताओं के मामलों की केवल शैक्षणिक मेरिट के आधार पर समीक्षा की गई। इस प्रक्रिया में करीब 160 अभ्यर्थी चयन क्षेत्र में पाए गए। इन अभ्यर्थियों को उपलब्ध रिक्त पदों पर नियुक्ति दी जाएगी, लेकिन यह नियुक्ति केवल भावी प्रभाव (Prospective Effect) से होगी।

इन अभ्यर्थियों को पिछली तिथि से नियुक्ति, वरिष्ठता, सेवा की निरंतरता, एरियर, बकाया वेतन या अन्य किसी प्रकार का वित्तीय अथवा सेवा लाभ नहीं मिलेगा।

मेरिट सूची दोबारा तैयार करना संभव नहीं

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि वर्ष 2014 के फैसले के अनुसार नई समेकित मेरिट सूची तैयार करना अब व्यावहारिक नहीं है। कई जिलों की मूल इंटरव्यू सूची उपलब्ध नहीं है, कुछ रिकॉर्ड अधूरे हैं और कई मामलों में साक्षात्कार के अंक भी उपलब्ध नहीं हैं। लगभग 25 वर्ष बीत जाने के कारण पूरी चयन प्रक्रिया का पुनर्निर्माण संभव नहीं रह गया है।

यह फैसला भविष्य के मामलों में नहीं बनेगा नजीर

सरकार ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल वर्ष 1999 की जेबीटी भर्ती से जुड़े लंबे समय से लंबित विवाद के समाधान के लिए एकमुश्त विशेष कदम है। इसे भविष्य में किसी अन्य भर्ती या कानूनी मामले में नजीर (Precedent) के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकेगा।

खंडपीठ ने भी अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए समाधान के आधार पर पारित किया गया है। इसे अपीलों में उठाए गए कानूनी प्रश्नों पर अदालत की अंतिम राय नहीं माना जाएगा।

हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता भी दी है कि यदि वे सरकार को संतुष्ट कर सकें तो पिछली तिथि से लाभ या सांकेतिक सेवा लाभ देने के उनके अनुरोध पर सरकार विचार कर सकती है।

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