LNG TRAIN: करीब 2 महीने पहले देश में पहली हाईड्रोजन ट्रेन चलाने के बाद भारतीय रेल के इतिहास में एक ओर अध्याय जुड़ गया है। क्योंकि अब देश में पहली LNG ट्रेन का संचालन भी गुजरात के साबरमती से शुरू हो गया है। इसको भारतीय रेल के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है।
देश की पहली LNG ट्रेन रविवार को गुजरात के साबरमती से चलाई गई। इसको केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। LNG ट्रेन को भारतीय रेल के इतिहास में बड़ी क्रांति माना जा रहा है। क्योंकि एक साथ कई मोर्चों पर यह ट्रेन रेलवे को लाभ देने वाली होगी। साथ ही इससे डीजल पर निर्भरता कम हो जाएगी।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह ट्रेन किफायती रेल परिचालन के क्षेत्र में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि होने वाली है। साबरमती के साथ-साथ पूरा देश इस नई तकनीक से चलने वाली ट्रेन को लेकर उत्साहित है। आने वाले दिनों में अन्य रूटों पर भी इस ट्रेन के संचालन का रास्ता साफ हो जाएगा।
दरअसल 17 जुलाई 2026 काे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन को झंडी दिखा कर रवाना किया। अब करीब 2 महीने बाद ही देश की एक ओर महत्वपूर्ण ट्रेन LNG के रूप में शुरू हो गई है। जो अपने आप में एक मील का पत्थर है।
पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटेगी
भारत लगातार ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर अगरसर है। ऐसे में LNG से चलने वाली ट्रेन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। क्योंकि इससे पारंपरिक रूप से ईंधन के रूप में प्रयोग हो रहे डीजल पर निर्भरता कम होने की शुरूआत हो गई है। क्योंकि पहली बार ट्रेन को LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस आधारित फ्यूल प्रणाली पर चलने वाले इंजन से चलाया जा रहा है।
सबसे बड़ी बात यह है कि इस नई और हाइडब्रिड तकनीक के दम पर एक ही इंजन को LNG और डीजल यानी दोनों प्रकार के ईंधनों से चलाया जा सकता है। फिलहाल भारतीय रेलवे ने इस परियोजना के तहत 1400 हॉर्स पावर क्षमता के इजन यानी ड्राइविंग पावर कार LNG ड्यूल-फ्यूल प्रणाली में बदला है। इन पावर कार का करीब 2 हजार किलोमीटर का परीक्षण भी हो चुका है। इसमें यह नई तकनीक पूरी तरह से भरोसेमंद पाई गई है।
रेलवे को मोटी बचत
इस नई प्रणाली से जहां प्रदूषण का स्तर कम होगा, वहीं रेलवे को महंगे डीजल से भी निजात मिलेगी। परिणाम स्वरूप रेलवे को काफी लाभ होगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार परीक्षण के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके आधार पर कहा जा सकता है। एक इंजन से हर साल करीब 25 लाख रुपये की बचत होगी।
अब अनुमान लगाया जा रहा है कि इससे भारतीय रेल की यात्रा भी लोगों के लिए सस्ती होगी।
2200 लीटर LNG का टैंक
अभी रेलवे इन LNG ट्रेन चलाने के लिए जिस प्रकार के डिजाइन को मंजूरी दी है, उसमें 2200 लीटर LNG क्षमता का टैंक एक इजन में लगाया जाएगा।
इसमें प्रयोग के लिए करीब 900 किलोग्राम LNG भरी जा सकती है। इस ईंधन से इंजन एक बार में करीब 1600 किलोमीटर संचालन कर सकता है।

