urea purchase verification : हरियाणा में अब अगर किसान ने 50 बैग से अधिक यूरिया खरीदा तो शक के दायरे में आ जाएगा और ऐसे किसानों को कृषि विभाग की जांच से होकर निकलना होगा। कृषि विभाग पता लगाएगा कि किसान द्वारा लिया गया यूरिया वास्तव में फसल में प्रयोग हुआ है या नहीं।
सरकार को अंदेशा है कि किसानों के नाम पर यूरिया लेकर कहीं फैक्ट्रियों में तो यूरिया को नहीं बेचा जा रहा है। ऐसे में 50 बैग से ज्यादा यूरिया लेने वाले किसान इस बार जांच के दायरे में आएंगे।
यूरिया की कालाबाजारी और इसका दुरुपयोग रोकने के लिए खरीफ व रबी सीजन में अधिक यूरिया खरीदने वाले किसानों से पूछताछ होगी। एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (आइएफएमएस) और आधार कार्ड से जुड़े रिकार्ड से 50 वैग से अधिक यूरिया बैग खरीदने वाले किसानों की पहचान होगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी जांच करेंगे कि संबंधित किसान ने जितनी मात्रा में यूरिया खरीदा है, उसकी वास्तविक रूप से कृषि कार्य में खपत हुई है या नहीं। मार्च से लेकर जुलाई 2026 तक गोहाना में 1,642 किसानों ने इससे अधिक यूरिया बैग खरीदे हैं।
पूर्व में कई जगह यूरिया की कालाबाजारी के मामले सामने आ चुके हैं। आशंका है कि सस्ते दाम पर मिलने वाले यूरिया की कालाबाजारी हो सकती है और इसे फैक्ट्रियों में खपाया जा सकता है। किसानों को सब्सिडी पर यूरिया का बैग लगभग 267 रुपये में मिलता है, जबकि यही यूरिया खुले बाजार में या औद्योगिक उपयोग के लिए दो हजार रुपये या इससे भी अधिक भाव पर मिलता है। कीमत में बड़े अंतर के कारण यूरिया की कालाबाजारी की संभावना रहती है।
आइएफएमएस के आधार पर होगी जांच कृषि विभाग के अधिकारी आइएफएमएस और आधार कार्ड डेटा के आधार का मिलान करेंगे। खाद विक्रेता को हर बिक्री पर किसान के आधार कार्ड में रिकार्ड दर्ज कराने के साथ बायोमेट्रिक लगाना होता है। इससे पोर्टल पर दर्ज डेटा से पता चलता है कि किस किसान ने कितने बैग खरीदे। जो किसान ज्यादा यूरिया लेता है उसका रिकार्ड मुख्यालय की तरफ से भेजा जाएगा, जिसके आधार पर अधिकारी मौके पर पहुंचकर जांच करेंगे।
सामने आ चुके हैं सरता यूरिया बेचने के मामले
पहले सिरसा, यमुनानगर, करनाल और अंबाला में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जहां ट्रकों में भरकर सब्सिडी वाला यूरिया फैक्ट्रियों में ले जाया जा रहा था। यमुनानगर के प्लाईवुड उद्योग में यूरिया के अवैध उपयोग के कई केस सामे आ चुके हैं। इसके बाद सरकार और विभाग ने सख्ती बढ़ाई।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग एसडीओ डा. राजेंद्र प्रसाद मेहरा ने बताया कि मुख्यालय की तरफ से खरीफ व रबी के सीजन में उन किसानों की सूची जारी की जार ही है जो अधिक यूरिया खरीदते हैं। ऐसे किसानों से पूछता करके कृषि रकबे की भी जांच की होगी। सरकार का इसका मकसद किसानों को परेशान करना नहीं बल्कि यूरिया की कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

