Success Story Neeru Dhanda: एशियाई गोल्ड मेडलिस्ट नीरू ढ़ाडा ने यह सफलता हासिल कर पूरे देश में अपने गांव और जींद जिले का नाम रोशन कर दिया है। हरियाणा प्रदेश के जींद जिले के संगतपुरा गांव में जन्मी नीरू आज पूरे देश में एक चमकता हुआ सितारा बन गई हैं। नीरू की इस सफलता के पीछे उनकी मां सुदेश के संघर्षों की एक प्रेरणादायक कहानी छिपी हुई है।
नीरू की मां ने अपना पूरा जीवन तंगहाली में गुर्जर दिया लेकिन कभी अपनी बेटी के सपनों को नहीं करने दिया। नीरू की मां के संघर्ष का ही परिणाम है कि आज जींद जिले के छोटे से गांव संगतपुरा में जन्मी नीरू ने जापान में चल रहे एशियाई गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल कर अपने माता-पिता और संगतपुरा गांव के ग्रामीणों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
गांव में भैंस पालकर नीरू की मां सुदेश ने बेटी को बनाया शूटर
जींद जिले के संगतपुरा गांव में नीरू के पिता अपनी पुस्तैनी तीन एकड़ जमीन पर खेती-बाड़ी करते हैं। नीरू के परिवार की आर्थिक हालात काफी कमजोर बताई गई है। लेकिन तंगहाली भरे जीवन के बावजूद नीरू की मां सुदेश ने घर में पशुपालन कर अपनी बेटी को देश का सबसे बड़ा शूटर बना दिया।
एशियाई गोल्ड मेडलिस्ट नीरू ढांडा ने कहा कि आज उनकी सफलता के पीछे उनकी मां का संघर्ष छिपा हुआ है। नीरू की मां ने घर पर भैंस पालकर और उनसे होने वाली पूरी कमाई अपनी बेटी के खेल को निखारने और संवारने में लगा दी। इसी का परिणाम है कि नीरू ने आज पूरे देश को गर्व की अनुभूति कराई है।
कबड्डी में सफलता नहीं मिलने के बाद चुनाव शूटिंग
नीरू द्वारा एशियाई गोल्ड मेडल के साथ देश का नाम रोशन करने के पिछे उनकी कड़ी मेहनत के साथ अनगिनत संघर्ष भी में हुए हैं। नीरू ढ़ाडा ने पहले कबड्डी खेल को चुना था लेकिन उसमें सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने शूटिंग खेल में भाग लेने का फैसला लिया। इतना ही नहीं उनके कोच मनेसर सिंह ने बताया कि नीरु एशियन गेम्स से ठीक पहले वायरल के चलते अस्पताल में भर्ती थी। लेकिन इसके बावजूद उसने खेल के मैदान में एक योद्धा की तरह अपना हुनर दिखाया और गोल्ड मेडल हासिल किया।

