हरियाणा में मानसून की सुस्त रफ्तार ने किसानों और आमजन की चिंता बढ़ा दी है। पश्चिमी हवाएं चलने से दिन में सूर्य की तपिश बढ़ने लगी है जिससे दिन और रात दोनों के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। पश्चिमी हवाओ के असर से प्रदेश में औसतन अधिकतम तापमान सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया है।
राज्य के लगभग एक दर्जन जिलों के प्रमुख शहरों और केंद्रों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा पहुंच चुका है। इनमें गुरुग्राम, नारनौल, चरखी दादरी, भिवानी, रोहतक, हिसार, सिरसा और कुरूक्षेत्र शामिल हैं। यहां सूर्य की तपिश लोगों के पसीने छूटा रही है।
मानसून सीजन के बीच तापमान में लगातार वृद्धि और हवा में मौजूद नमी को देखते हुए कृषि मौसम विज्ञान विभाग द्वारा किसानों और पशुपालकों के लिए स्पेशल एडवाइजरी जारी की गई है।
कपास किसानों को सचेत रहने की सलाह
हवा में मौजूद नमी और गर्मी के कारण कपास की फसल में सफेद मक्खी, चेपा और गुलाबी सुंडी का प्रकोप बढ़ सकता है। यदि सफेद मक्खी का अटैक बहुत ज्यादा हो जाए तो साफ मौसम में सिफारिश की गई कीटनाशक दवाएं जैसे फ्लोनिकामिड या अफिडोपायरोपेन आदि का छिड़काव करें। कीटनाशक दवाओं का छिड़काव मौसम साफ रहने पर ही करें। वहीं, आगामी दिनों में छिटपुट बारिश की संभावना को देखते हुए खड़ी फसलों में फिलहाल सिंचाई रोकने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही धान की फसल में जड़ घुन के प्रकोप पर नजर करें। शाम के समय यूरिया खाद का छिड़काव करने से परहेज़ करें और इसे कीटनाशक दवाओं के साथ मिलाकर तो बिल्कुल भी छिड़काव न करें।
पशुओं का रखें विशेष ध्यान
लगातार बढ़ते तापमान से पशुओं को उमस और शारिरिक तनाव से बचाव हेतु बाड़े में हवा का आदान-प्रदान और पंखों का उचित प्रबंध करें। पशुओं को मच्छरों से बचाने के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें। पशुओं को साफ पानी पिलाएं और रोजाना खुराक में 50 ग्राम आयोडिन युक्त नमक तथा मिनरल मिक्सचर जरूर मिलाएं।
मानसून टर्फ की अक्षय रेखा और उत्तर प्रदेश में बने कम दबाव के क्षेत्र के असर से हरियाणा प्रदेश में 8 सितंबर से मानसून की सक्रियता कम हो चुकी है। इससे तापमान में बढ़ोतरी और हवा में नमी का असर दिखेगा। डॉ मदन खीचड़, कृषि मौसम विभाग, HAU।

