हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सूबे की नायब सैनी सरकार ने विशेष तकनीक व सख्त निगरानी की योजना बनाई है। अब फसल अवशेष जलाने वालों का पूरा ब्योरा एक विशेष ऐप में दर्ज होगा। इसके लिए 8 हजार से ज्यादा नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक अधिकारी को 100-100 किसानों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
तुरंत दर्ज होगी एफआईआर
नोडल अधिकारी ऐप के जरिए धान उगाने वाले किसानों की कटाई से लेकर अवशेष प्रबंधन तक की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। पराली जलाने की सूरत में ऐप पर फोटो अपलोड कर तुरंत जुर्माना व एफआईआर दर्ज की जाएगी।
गुरुवार को आयोजित हुई वायु गुणवत्ता आयोग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक में इन तैयारियों की समीक्षा की गई है। निगरानी को पुख्ता बनाने के लिए विशेष रूप से शाम 3 से रात 9 बजे तक उच्च गुणवत्ता वाले कैमरों, GNSS और लाइव स्ट्रीमिंग से लैस ड्रोन से निगरानी की जाएगी।
पहले होगा ट्रायल
संवेदनशील हॉटस्पॉट गांवों की ड्रोन मैपिंग कर डेटा को राजस्व नक्शों से जोड़ा जाएगा और 3 महीने तक वीडियो रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाएगा। योजना के तहत पराली प्रबंधन और वैज्ञानिक निगरानी के लिए 746 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, ताकि साल 2030 तक पराली जलाने पर पूर्ण नियंत्रण का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
फसल कटाई से पहले 1 ब्लॉक का चयन होगा। इसके रेड व यलो जोन के गांवों में ट्रायल भी किया जाएगा। इस दौरान न केवल ऐप को परखा जाएगा, बल्कि ड्रोन भी उड़ाकर देखे जाएंगे। फिलहाल दृश्या के 15 ड्रोन उड़ेंगे। इसके बाद पूरे प्रदेश में पुलिस के ड्रोन भी फसल अवशेष को जलाने से रोकने में लगाए जा सकते हैं।

