हरियाणा के जींद में एक अस्पताल के डायरेक्टर और दो डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज की गई है। वकील की मौत के मामले में कोर्ट ने ये कार्रवाई की है। पुलिस ने अदालत के निर्देशों के तहत मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला ?
मिली जानकारी के अनुसार ये मामला फरवरी 2026 में एडवोकेट पुष्पेंद्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से जुड़ा है। 17 फरवरी 2026 की रात पुष्पेंद्र का ब्लड प्रेशर बढा और उसे पैरालिटिक अटैक आया। जिसके बाद उनके परिजन उन्हें सिविल अस्पताल लेकर गए थे।
जहां से उन्हें PGIMS रोहतक रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि एंबुलेंस चालक उन्हें चौधरी कुलदीप सिंह मेमोरियल अस्पताल ले गया। वहां डॉक्टरों ने इलाज का लगभग 2.10 लाख रुपये का खर्च बताया।
मृतक के परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
इतना ही नहीं बल्कि डॉक्टरो ने परिजनों की बिना लिखित अनुमति के ही मरीज की न्यूरोसर्जरी भी कर दी। बताया जा रहा है कि सर्जरी और इलाज के समय कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट और प्रशिक्षित एनेस्थिसियोलॉजिस्ट मौजूद नहीं थे। ऑपरेशन के बाद मरीज को आवश्यक पोस्ट-ऑपरेटिव केयर नहीं दी गई, जिससे 22 फरवरी 2026 को उसकी मौत हो गई।
जिसके बाद मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए। ये मामला कोर्ट तक पहुंचा। अब न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विवेक सिंह की अदालत ने इसे प्रथम दृष्टि से संज्ञेय अपराध माना और पुलिस को तुरंत केस दर्ज करने का आदेश दिया।
अस्पताल डायरेक्टर और दो डॉक्टरों पर केस दर्ज
जिसके बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने अदालत का फैसला मानते हुए चौधरी कुलदीप सिंह मेमोरियल अस्पताल के डॉ. नमन तनेजा, डॉ. कनिका और अस्पताल के डायरेक्टर दीपांकर देसवाल के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में कोर्ट ने 18 जुलाई 2026 को सिविल लाइन थाना पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। फिलहाल पुलिस ने अदालत के निर्देशों के तहत मामले की गहनता से जांच शुरू कर दी है।

