वॉयस ऑफ पानीपत (तमन्ना गोयल)- दिल्ली हाई कोर्ट ने डाबर इंडिया को अंतरिम रहते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के उसे आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें डाबर के ‘ ‘100% नेचुरल ‘, ‘100%प्योर’ और ‘100% ऑर्गेनिक ‘ जैसे दावे वाले कुछ उत्पादों की बिक्री तुरंत तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही इस पर जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और जब तक इस मामले में अगली सुनवाई नहीं होती तब तक यह बेन आर्डर सस्पेंड रहेगा।

किन प्रोडक्ट्स पर लगी थी रोक:-
- डाबर हनी
- डाबर हनी स्क्वीज़ी
- डाबर सुंदरबन्स हनी
- डाबर हिमालयन एप्पल साइडर विनेगर
- डाबर वरजिन कोकोनट ऑयल
- डाबर काउ घी
- रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वाटर
- डाबर होममेड कोकोनट मिल्क
- डाबर ऑर्गेनिक हनी
FSSAI कहना था कि लेवल पर हंड्रेड परसेंट जैसे दावों का इस्तेमाल भ्रमित करने वाला और अस्पष्ट है। साथ ही नियामक का तर्क था कि इन दावों की कोई वेरिफिकेशन नहीं की जा सकती। और इससे ग्राहकों को गलत जानकारी मिलने की संभावना रहती है।
डाबर ने कोर्ट में क्या कहा:-
डाबर का मुख्य तर्क था कि FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड रेगुलेशंस,2018 के तहत तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। डाबर के मुताबिक , कंपनी को कार्यवाही से पहले ना तो कोई कारण बताओं नोटिस दिया गया और ना ही कोई सुधार नोटिस। और कंपनी को अपना पक्ष रखने का या स्पष्टीकरण देने का मौका दिए बिना अचानक बिक्री रोकने का आदेश जारी किया गया। डाबर ने यह भी तर्क दिया कि FSSAI अधिनियम , 2006 की धारा केवल मार्गदर्शक सिद्धांत बताती है और इससे सीधे बिक्री रोकने का अधिकार नहीं मिलता। कंपनी के अनुसार आदेश में यह विश्वास नहीं किया गया कि ‘100% प्योर’ ya ‘100% नेचुरल ‘ जैसे शब्द नियम का उल्लंघन कैसे करते हैं। मामले के सुनवाई के दौरान डाबर ने कहा कि FSSAI ने अपने आदेश में यह कहीं भी स्पर्श नहीं किया है कि यह उत्पाद मिलावटी, असुरक्षित,नकली या घटिया है । यह विवाद केवल पैकेट के लेबल और विज्ञापनों पर लिखे शब्दों तक सीमित है।
बिज़नस पर असर:-
कंपनी ने कोर्ट को बताया कि इस आदेश से कंपनी को भारी व्यवसायिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्हें बाजार में पहले से मौजूद स्टॉक को वापस मंगाने या उनकी रीपैकेजिंग करने की नौबत आ गई थी। और FSSAI द्वारा इस आदेश को सार्वजनिक करने और ऑनलाइन रिटेलर्स को बिक्री रोकने की सलाह देने से कंपनी के व्यापार पर बुरा असर पड़ा।
आगे क्या होगा:-
इस आदेश के बाद आबिदा पर अपने सभी प्रोडक्ट्स के बिक्री पहले की तरह जारी रख पाएगा। सती ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेलर्स एंड प्रोडक्ट्स को बेचने से नहीं रोकेंगे। इसी के साथ फिलहाल कंपनी को रीपैकेजिंग या बाजार से पुराना स्टॉक वापस मांगने की जरूरत नहीं होगी।
कानूनी प्रक्रिया:-
दिल्ली हाई कोर्ट के नोटिस के बाद केंद्र सरकार और FSSAI को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद डाबर की याचिका पर कोर्ट अगली सुनवाई करेगी और यह तय करेगी की FSSAI का 3 अगस्त का आदेश कानूनन सही था या उसे पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए।
TEAM VOICE OF PANIPAT

