वॉयस ऑफ पानीपत ( श्रद्धा गुप्ता ) – अभी तक डेंगू जैसी बिमारी का इलाज केवल कुछ सामान्य दवाईयां थी कोई स्पैशयल डोज़ नही लेकिन जापानी कंपनी की खोज से ये समस्या भी आज दूर हो गइ है , पहली डेंगू वैक्सीन ( TAK- 003 ) जिस पर मोहर MADE IN INDIA की लगेगी । क्यूंकि जापानी कंपनी ( ताकेडा ) ने भारत , हैदराबाद की एक जानी मानी फारमा कंपनी ( BIOLOGICAL- E ) से हाथ मिला लिया है । जिससे डेंगू जैसी बिमारी का इलाज अब भारत में आसानी से हो सकेगा अब घबराने की ज़रूरत नहीं । सबसे अच्छी बात विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में ( Q-DENGA ) के इस्तेमाल की सिफारिश का समर्थन किया है , मतलब ज्यादा संक्रमण वाले इलाकों में इसे सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में बिना प्री-वैक्सीनेशन स्क्रीनिंग के शामिल किया जा सकता है ।
अब जानते हैं पहली डेंगू वैक्सीन ( TAK 003 ) यानी QDENGA से जुड़ी कुछ मुख्य बातें :
1.जापानी कंपनी के मुताबिक, यह वैक्सीन 4 से 60 साल तक के लोगों को लगाई जा सकेगी , इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की जरूरत नहीं होगी कि व्यक्ति पहले कभी डेंगू से संक्रमित हुआ था या नहीं।
2.भारत में मिली मंजूरी ताकेदा के वैश्विक क्लीनिकल डेवलपमेंट प्रोग्राम के आधार पर दी गई है , इसके तहत फेज-I, फेज-II और फेज-III के कुल 19 क्लीनिकल ट्रायल किए गए, जिनमें 28 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया ,
3.QDENGA की दो डोज दी जाती हैं , प्रत्येक डोज 0.5 मिलीलीटर की होती है और त्वचा के नीचे इंजेक्शन के जरिए लगाई जाती है , दोनों डोज के बीच तीन महीने का अंतर रखा जाता है ।

आम मच्छर से अलग होता है डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर
QDENGA को WHO की प्री-क्वालिफिकेशन भी मिल चुकी है , इसका मतलब है कि यह गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है। इसके बाद UNICEF और पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (PAHO) जैसी वैश्विक एजेंसियां भी इसकी खरीदी कर सकती हैं। डेंगू मच्छरों से फैलने वाली वायरल बीमारी है, जिसके मामले 125 से ज्यादा देशों में सामने आते हैं। कंपनी के मुताबिक, दुनिया में डेंगू के कुल मामलों का करीब एक-तिहाई बोझ भारत पर है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और मच्छरों के बढ़ते प्रजनन के कारण संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है उसी का इलाज हमने अब मिल कर समझ के साथ ढ़ूंढ निकाला है ।
TEAM VOICE OF PANIPAT

