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March 12, 2026
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सबसे खतरनाक कौन सा है ‘आई फ्लू’? पढ़िए पूरी खबर

वायस ऑफ पानीपत (शालू मौर्य):- बदलते मानसून के कारण देशभर में हालातों की तस्वीरें लगातार सामने आ रही है…मानसून का यह सीजन अपने साथ सुहाना मौसम ही नहीं, बल्कि कई सारी समस्याएं भी लेकर आता है। इस मौसम में कई सारी बीमारियों और संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है… Eye Flu के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं… यह एक तरह का संक्रमण है जिसमें आंखों की सामने की सतह को कवर करने वाली कंजंक्टिवा की में सूजन होती है। ऐसे में इस संक्रमण और इसके प्रकार और इससे बचाव के तरीकों लोगों को इस बीमारी से जुड़ी सभी जानकारी पता हो….

आपको बता दे कि आई फ्लू, जिसे आमतौर पर पिंक आई या कंजंक्टिवाइटिस कहा जाता है, कंजंक्टिवा की सूजन है… कंजंक्टिवा एक पतली पारदर्शी परत है, जो आंख की सामने की सतह और पलकों के अंदर की रेखा को कवर करती है… यह संक्रमित आंखों के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है और बहुत संक्रामक होता है। आंखें लाल होना, फ्लूइड डिस्चार्ज, खुजली और प्रकाश संवेदनशीलता इसके लक्षण हैं। यह आमतौर पर एक या दो सप्ताह में अपने आप ठीक हो जाता है…

आई फ्यू के निम्न प्रकार होते हैं…

1.बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस :- यह संक्रमण आमतौर पर स्टैफिलोकोकस ऑरियस और स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया बैक्टीरिया के कारण होता है। इससे आंखों के चारों ओर रेडनेस, सूजन, चिपचिपा या मवाद जैसा डिस्चार्ज और पपड़ी जम जाती है। यह बहुत संक्रामक भी हो सकता है।

2.केमिकल कंजंक्टिवाइटिस:- आई फ्लू का यह प्रकार धुएं, एसिड या अल्कलाइन जैसे पदार्थों के संपर्क में आने के बाद विकसित होता है… इसके परिणामस्वरूप आंखों में गंभीर खुजली, रेडनेस और ब्लर विजन हो सकती है… इसके इलाज का सबसे अच्छा तरीका सबसे पहले आंखों को पानी से अच्छी तरह से धोना और फिर डॉक्टर से संपर्क करना है…

3.एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस परागकण :- पालतू जानवरों की रूसी, धूल के कण या कुछ रसायनों सहित अन्य एलर्जी आइ फ्यू के इस प्रकार का कारण बन सकती है… परिणामस्वरूप दोनों आँखों में गंभीर जलन, रेडनेस और तरल डिस्जार्च हो सकता है… एलर्जी से बचने के अलावा, एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस का इलाज अक्सर एंटीहिस्टामाइन आई ड्रॉप्स या ओरल दवाओं से किया जा सकता है और यह संक्रामक नहीं है…

*आई फ्लू से बचाव के उपाय*

1. हर 2 घंटे में बार-बार हाथ धोएं या सैनिटाइज करें

2. आंखों को न छुएं। आप इसके लिए चश्मा या गॉगल पहन सकते हैं।

3.आंखों में परेशानी होने पर खुद इलाज करने से बचें।

4. सार्वजनिक स्थानों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों, विशेषकर सार्वजनिक स्विमिंग पूल से बचें।

5. अगर आप आई फ्लू से संक्रमित हैं, तो खुद को आइसोलेट कर लें, जब तक आंखों से पानी आना बंद न हो।

TEAM VOICE OF PANIPAT

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