वॉयस ऑफ पानीपत ( तमन्ना गोयल ) – हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में शवों को रखने की व्यवस्था को लेकर हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग ने कहा है कि मृतकों की गरिमा के साथ किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने सोनीपत और फरीदाबाद से जुड़े दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के बाद यह निर्देश जारी किए। आयोग ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने जिलों के सरकारी अस्पतालों में शवगृहों में लगे सभी फ्रीजर चैंबरों का नियमित निरीक्षण करवाएं और उन्हें हर समय कार्यशील रखें।

HHRC ने दिखाई अस्पतालों के शवगृहों पर सख्ती
क्या था मामला?
पानीपत निवासी जोगेन्द्र सिंह ने आयोग में शिकायत दी थी कि जुलाई 2024 में उनके 30 वर्षीय बेटे विकास की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के लिए शव को सोनीपत सिविल अस्पताल भेजा गया। आरोप है कि वहां शव को सुरक्षित रखने और पहचान की प्रक्रिया में लापरवाही बरती गई। उनका कहना था कि पर्याप्त और चालू फ्रीजर न होने से शव संरक्षण प्रभावित हुआ और परिवार को मानसिक पीड़ा हुई। अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार सोनीपत सिविल अस्पताल में 8 डीप फ्रीजर हैं। बीपीएस राजकीय महिला मेडिकल कॉलेज, खानपुर कलां में भी मॉर्च्युरी चैंबर की सुविधा है।साथ ही बीके सिविल अस्पताल की रिपोर्ट में बताया गया कि अस्पताल में कुल 14 डेड बॉडी फ्रीजर चैंबर हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 10 ही कार्यशील हैं। 4 फ्रीजर अस्थायी रूप से बंद पाए गए।अस्पताल में यहां रोजाना औसतन 5 से 10 पोस्टमार्टम होते हैं।
आयोग का संदेश:-
आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि शवों का सम्मानपूर्वक संरक्षण करना स्वास्थ्य संस्थानों की कानूनी और मानवीय जिम्मेदारी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी।आयोग ने राज्यभर के अस्पतालों को यह भी कहा है कि वे शवगृहों की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में ऐसी शिकायतें न आएं।
TEAM VOICE OF PANIPAT

