IPS SUCCESS STORY : हरियाणा के पानीपत जिला के छेटे से गांव भादर की बेटी रितू खोखर ने IPS बन कर कमाल कर दिया। रितू ने सरकारी स्कूल में पढ़ कर यह उपलब्धी पाई है। फिलहाल रितु खोखर बतौर IPS महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में बतैार एसपी तैनात हैं।
उन्होंने 2017 में यूपीएससी की परीक्षा पहले ही प्रयास में क्रेक करते हुए 141वीं रैंक प्राप्त कर पुलिस अधिकारी बनने की राहत पकड़ ली। रितू खोखर की कहानी युवाओं को प्रेरित कर रही है। क्योंकि रितू खोखर साधारण किसान परिवार से आती हैं और उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर देश की सबसे कठिन परीक्षा में शानदार रैंक प्राप्त की।
आज कल रितू खोखर की कई सारी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल रहती हैं। इसमें वे अलग-अलग स्थितियों में नजर आती हैं। कभी गाड़ी से उतरते हुए उनकी वीडियो आती है तो कभी सलामी लेते हुए और निरीक्षण के दौरान की वीडियो लोगों को खूब पसंद आ रही हैं।
सुविधा नहीं हौसले को बनाया मजबूती
कई लोग यह भी कहते हैं कि बेहतर कोचिंग और अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाई करके ही यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में पार पाया जा सकता है। वहीं रितू खोखर ने इसको झुठला दिया है। क्योंकि उनकी 10वीं तक की पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई है। गांव के सरकारी से पढ़ाई करके भी उन्होंने देश की बेहतरीन सेवाओं में अपना स्थान बनाया है।
2017 में यूपीएससी परीक्षा पास करने के बाद रितु खोखर को महाराष्ट्र कैडर मिला और व 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी बनी। 2017 में हुई यूपीएससी की परीक्षा में उनको 141वीं रैंक मिली। हालांकि इसके लिए उन्होंने तैयारी करते हुए दिल्ली में कोचिंग भी ली है।
23 साल की उम्र में यूपीएससी क्लीयर
आईपीएस रितू खोखर का जन्म 23 अक्टूबर 1994 को हरियाणा में पानीपत जिले के भादर गांव के एक साधान किसान परिवार में हुआ। उनके पिता ताराचंद और माता सुनीता देवी हैं।
किसान परिवार से आते हुए उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई 10वीं तक गांव के सरकारी स्कूल से ही पूरी की है। हालांकि 12वीं तक की पढ़ाई पानीपत में की और इसके बाद कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में पढ़ाई की। इसी दौरान उन्होंने एमएससी गणित में 2016 में गोल्ड मेडल के भी प्राप्त किया।
अर्जून जैसा निशाना, सिर्फ यूपीएससी ही लक्ष्य
रितू खोखर ने यूपीएससी के लक्ष्य को अर्जून की तरह निशाने पर रखा। सिर्फ यूपीएससी को ही अपना लक्ष्य रखा। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ ही प्रतियोगी परीक्षा के लिए आवेदन किया है और वह है यूपीएससी।
यही कारण है कि दिल्ली में आकर उन्होंने लगातार 9 महीने तक तैयारी की और पहले ही प्रयास में यूपीएससी में सफलता के झंडे गाड़ दिए।

