METRO RULE: आजकल दिल्ली जैसे शहर में मेट्रो ट्रेन लोगों की जीवन रेखा बन गई है। कहीं भी जाना हो तो मेट्रो सबसे आसान यातायात साधन नजर आती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मेट्रो स्टेशन पर टॉयलेट प्रयोग करने पर जो 5 रुपये का शुल्क लिया जाता है, वह वैध है या अवैध।
जब भी आप मेट्रो स्टेशन में जाते हैं और अपासे टॉयलेट प्रयोग करने के लिए 5 रुपये लिए जाते हैँ, यह सवाल आपके मन में भी आता होगा कि क्या यह राशि कौन लोता है। साथ ही इस सेवा के लिए 5 रुपये ही क्यों निर्धारित किए गए हैं। आइए आज इस सवाल का सही उत्तर जानते हैं।
क्या है नियम
दरअसल एक तो तय है कि मेट्रो स्टेशन पर टॉयलेट प्रयोग के लिए पैसे देने होते हैं। लेकिन इसके नियम क्या हैं यह जानकारी होना जरूरी है। क्योंकि दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन यानी डीएमआरसी द्वारा सेवा शुल्क तो तय कर दिया है, लेकिन यह साफ नहीं है कि कितने पैसे यात्रियों से लिए जाएं। ऐसे में जो रेट शौचालय के बाहर बोर्ड पर लिखा रहता है, वही रेट देना होता है। हालांकि इसके लिए सामान्य तौर पर यदि कोई यात्री सिर्फ पेशाब के लिए प्रयोग करता है तो उससे 2 रुपये लिए जाते हैं और टॉयलेट का प्रयोग करने पर 5 रुपये।
इसको लेकर डीएमआरसी द्वारा अपने सोशल मीडिया यानी एक्स अकाउंट पर भी जानकारी दी है कि यात्रियों को उतने ही पैसे देने होते हैं, जिनते बोर्ड पर लिखे रहते हैं। हालांकि नियम यह भी है कि यदि किसी यात्री के पास पैसे नहीं है और उससे टॉयलेट सुविधा की जरूरत है तो उसे मना नहीं किया जा सकता।
निशुल्क सेवा का नहीं प्रावधान
हालांकि इसके बारे में संसद में भी प्रश्न उठाया जा चुका है। इस पर सरकार की ओर से बताया गया कि निशुल्क टॉयलेट सेवा का कोई प्रावधान ही नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से कहा गया कि मुफ्त पानी और मुफ्त टॉयलेट की सुविधा को लेकर संबंधित मेट्रो प्रशासन ही फैसला कर सकता है। हालांकि डीएमआरसी द्वारा Consumer Protection Act, 2019 के तहत मेट्रो स्टेशनों पर मुफ्त उपलब्ध कराना जरूरी नहीं है।

